वृन्दावन। कालीदह क्षेत्र स्थित अखण्ड दया धाम में मंगलायतन सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के अंतर्गत तीसरे दिन व्यासपीठ से महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज ने देश-विदेश से आए भक्तों-श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति की महिमा बताते हुए कहा कि प्रभु भक्ति के बिना मानव जीवन अधूरा है।प्रभु की भक्ति अमूर्त है, इसे केवल अनुभव किया जा सकता है। हममें से ज़्यादातर लोग भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वे हमारी कुछ इच्छाएँ पूरी करें। क्या इसे भक्ति कहा जा सकता है? सच्ची भक्ति तो बिना किसी माँग के भगवान की पूजा करने में है।अगर भगवान हमें वह नहीं देते जिसकी हमें चाहत है, तो हमें समझना चाहिए कि हमें इसकी ज़रूरत नहीं है। अगर हम यह समझ जाएँ तो हम मुसीबतों से बाहर निकल जाएँगे और हमारे जीवन से दुख सदैव के लिए दूर हो जाएगा।
पूज्य भास्करानंद महाराज ने कहा कि ध्रुव और प्रहलाद जैसा प्रभु भक्त होना अत्यंत कठिन है। उन्होंने अपनी बाल्यावस्था में ही कठोर भगवद साधना करके परमात्मा को प्राप्त किया। इसीलिए हमें भी अपने बच्चों को प्रारंभ से ही प्रभु भक्ति की ओर अग्रसर करना चाहिए।जिससे उनके हृदय में बचपन से ही धर्म का प्रवेश हो सके।तभी हमारे बच्चे संस्कारवान और कर्तव्यशील बनेंगे।
इस अवसर पर महाराजश्री की परम् कृपापात्र शिष्या साध्वी कृष्णानंद महाराज, प्रख्यात साहित्यकार "यूपी रत्न" डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, डॉ. राधाकांत शर्मा, महोत्सव के आयोजक अशोक गुप्ता, श्रीमती ऊषा गुप्ता (निवाई,टोंक), वैशाली गुप्ता, विपिन गुप्ता आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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