प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक और पंजाब के पूर्व मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ 102 करोड़ रुपये से अधिक के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गुरुग्राम की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला फर्जी मोबाइल फोन (iPhone) निर्यात बिलों और कथित फर्जी जीएसटी (GST) लेनदेन से जुड़ा है।
ईडी ने इस वर्ष 9 मई को संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं और नियमित जमानत के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं। 
चार्जशीट में क्या कहा गया?
ईडी के अनुसार, जांच में सामने आया कि हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL), जो इस मामले में सह-आरोपी है और जिसके प्रमोटर-निदेशक संजीव अरोड़ा हैं, ने उनके नियंत्रण और निर्देशन में फर्जी मोबाइल फोन निर्यात के जरिए ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल नेटवर्क तैयार किया। 
चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने बिना वास्तविक सामान की आपूर्ति के शेल कंपनियों और एंट्री ऑपरेटरों के माध्यम से धन का लेनदेन किया। फर्जी मोबाइल फोन आपूर्ति श्रृंखला तैयार कर निर्यात मूल्य को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, ताकि निर्यात प्रोत्साहन और जीएसटी रिफंड का अवैध लाभ लिया जा सके।
इसके अलावा पहले से उपलब्ध कराए गए निर्यात भुगतान और समूह की अन्य कंपनियों में निवेश के जरिए अवैध धन को वैध कारोबारी आय और पूंजी के रूप में दर्शाया गया।
तीन चरणों में चलाया गया पूरा नेटवर्क
ईडी के मुताबिक, इस कथित घोटाले को तीन स्तरों पर अंजाम दिया गया— 
फर्जी घरेलू खरीद का रिकॉर्ड तैयार करना।
निर्यात दस्तावेजों और सीमा शुल्क (कस्टम) प्रक्रिया में हेराफेरी करना।
निर्यात भुगतान, जीएसटी रिफंड और समूह की कंपनियों व अचल संपत्तियों में निवेश के जरिए धन को वैध बनाना।
शेल कंपनियों के जरिए तैयार की गई फर्जी खरीद
चार्जशीट में कहा गया है कि HSRL ने एसके एंटरप्राइजेज, ग्लोबल ट्रेडर्स, वर्ल्डवाइड इलेक्ट्रॉनिक्स, जीएमजी ट्रेडलिंक, श्री लक्ष्मी एंटरप्राइजेज, मोबाइल स्टाइल, यूएस एंटरप्राइजेज, अंजनी इंटरनेशनल और मारुति नंदन टेलीकॉम एलएलपी सहित कई कंपनियों से महंगे Apple iPhone और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदने का दावा किया।
हालांकि, जांच में पाया गया कि इनमें से कई कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद शेल या एंट्री ऑपरेटर थीं, जिनका वास्तविक व्यापार लगभग नहीं था और उनका इस्तेमाल नकदी के बदले धन की परतें (लेयरिंग) तैयार करने के लिए किया गया।
कर्मचारियों ने भी किए अहम खुलासे
ईडी के अनुसार HSRL के कर्मचारियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि कंपनी में मोबाइल फोन कभी वास्तविक रूप से पहुंचे ही नहीं। न तो उनका भंडारण हुआ और न ही निरीक्षण। कर्मचारी केवल चालान, ई-वे बिल और बैंकिंग दस्तावेजों का काम देखते थे तथा उन्हें माल के वास्तविक अस्तित्व या आवाजाही की कोई जानकारी नहीं थी।
उन्होंने यह भी बताया कि आपूर्तिकर्ताओं को कोई औपचारिक खरीद आदेश जारी नहीं किए जाते थे और अधिकांश बातचीत व्हाट्सएप के जरिए होती थी, जिसका कोई सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
43 शिपिंग बिलों से 102.99 करोड़ की कथित अवैध कमाई
जांच एजेंसी के अनुसार अब तक की जांच में 43 शिपिंग बिलों के जरिए किए गए फर्जी निर्यात से 102,99,21,974 रुपये की अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का पता चला है।
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि हालांकि HSRL का मुख्य कारोबार रियल एस्टेट था, लेकिन मोबाइल फोन निर्यात कारोबार के पीछे संजीव अरोड़ा ही प्रमुख निर्णय लेने वाले व्यक्ति थे।
जांच में यह भी सामने आया कि मोबाइल डिवीजन के लिए बनाए गए आईसीआईसीआई बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता भी संजीव अरोड़ा थे और इसी खाते में लगभग 102.50 करोड़ रुपये की निर्यात राशि प्राप्त हुई, जिसे ईडी अपराध से अर्जित धन मान रही है। 
-Legend News

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