रिपोर्ट : LegendNews
सभापति सीपी राधाकृष्णन बोले, वेल में आने और प्लेकार्ड दिखाने पर होगी कार्रवाई
संसद के मानसून सत्र में सियासी घमासान लगातार जारी है। राज्यसभा और लोकसभा दोनों ही सदनों में में बुधवार को भी हंगामा जारी रहा। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी को देखते हुए कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, राज्यसभा में भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही संचालित की गई। हालांकि, हालात नहीं बदले तो कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।
हंगामे पर सीपी राधाकृष्णन की दो टूक
राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मैं सभी सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे सहयोग करें। मेरी आप सभी से दो विनम्र प्रार्थनाएं हैं। पहली, सदन के वेल में कभी न आएं। दूसरी, तख्तियां (प्लेकार्ड) कभी न दिखाएं। इन दोनों बातों का सभी सदस्यों को पालन करना होगा। यदि कोई सदस्य इन दोनों निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो मैं उसकी बात नहीं सुनूंगा। मैं उसे बोलने का अवसर नहीं दे पाऊंगा और मुझे उसके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए विवश होना पड़ेगा। इसलिए इन दोनों बातों से परहेज करें। यह मेरा आप सभी से अनुरोध है।
सदन में नहीं थम रही नारेबाजी
हालांकि सभापति के इस निर्देश के बावजूद सदन में लगातार नारेबाजी होती रही। राज्यसभा में दिन की शुरुआती कार्यवाही शुरू होने पर भी सदन में गतिरोध दिखाई दिया। 11 बजे सबसे पहले राज्यसभा की कार्यवाही की शुरुआत में विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित आवश्यक विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे गए। इसके उपरांत शून्यकाल की कार्यवाही प्रारंभ हुई। अभी कुछ ही सांसदों ने अपने वक्तव्य शून्यकाल के दौरान सदन में रखे थे, लेकिन जल्द ही हंगामा बढ़ गया और शून्यकाल की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी।
विपक्ष से बोले सभापति, ये नियम के खिलाफ
विपक्षी सांसदअपनी सीटों से उठकर आगे गए और नारेबाजी करने लगे। इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सभी सदस्यों को अपनी सीटों पर वापस जाने के लिए कहा, लेकिन नारेबाजी जारी रही। कई विपक्षी सांसद हाथों में नारे लिखे हुए प्लेकार्ड लेकर सदन में आए। इस पर सभापति ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सही नहीं है और नियम के खिलाफ है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी प्रदर्शन
इससे सदन में शून्यकाल की कार्यवाही बाधित हुई। शून्यकाल में केवल कुछ ही सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। यही स्थिति प्रश्नकाल में भी बनी रही। गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में संसद के दोनों सदन, लोकसभा और राज्यसभा में यही स्थिति बनी हुई है। सदन में शून्यकाल के साथ-साथ प्रश्नकाल की कार्यवाही भी लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रही है।
-Legend News

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