केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों से जुड़े कथित 661 करोड़ रुपये के सरकारी धन घोटाले की जांच के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में छह स्थानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड जब्त किए हैं।
सीबीआई के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जांच के सिलसिले में की गई। छापेमारी हरियाणा कैडर के कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड तथा उसके निदेशक से जुड़े परिसरों पर की गई। 
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित धोखाधड़ी से हरियाणा सरकार के आठ विभाग प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ प्रशासन के अंतर्गत आने वाले चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (सीआरईएसटी) भी इस मामले से प्रभावित बताए गए हैं। 
सीबीआई का आरोप है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर विशेष बैंक खाते खुलवाए और सरकारी धन को उनमें स्थानांतरित किया। बाद में इस धनराशि का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कर्मचारियों ने लेन-देन को सुगम बनाने और अनियमितताओं पर कार्रवाई न करने के बदले कथित रूप से अनुचित लाभ प्राप्त किए।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि अपराध से प्राप्त धनराशि का एक हिस्सा नोएडा स्थित निजी कंपनी विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में जमा किया गया, जिसे बाद में कंपनी के निदेशक के निजी खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
सीबीआई ने बताया कि यह जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से हस्तांतरित एक मामले और चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज दो मामलों से संबंधित है। इन मामलों में आपराधिक साजिश, सरकारी धन के दुरुपयोग और बैंक अधिकारियों व लोक सेवकों की कथित मिलीभगत की जांच की जा रही है। 
-Legend News

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