भारत से सीमा विवाद के मामले में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को बड़ा झटका लगा है. बालेन शाह ने ब्रिटेन से भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने में मदद मांगी थी. बालेन का कहना था कि सुगौली का जो समझौता हुआ था, उसमें ब्रिटेन पक्षकार था. अब उसे आगे आना चाहिए. ब्रिटेन ने इसमें पड़ने से इंकार कर दिया है. ब्रिटेन का कहना है कि भारत के मामले में लंदन दखल नहीं देगा. 
दरअसल, सुगौली संधि का हवाला देते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन से मदद मांगी थी, जिसे ब्रिटेन ने ठुकरा दिया है. ब्रिटेन ने कहा कि भारत और नेपाल का मामला द्विपक्षीय है. इसमें लंदन कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा. बालेन शाह को यह झटका ऐसे वक्त में लगा है, जब भारत से सीमा विवाद को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री अपने घर में भी बुरी तरह घिर गए हैं.

द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक पिछले दिनों बालेन शाह के मुख्य सलाहकार कुमार ब्यांजंकर ने राजधानी काठमांडू में ब्रिटिश राजदूत रॉबर्ट फेन से मुलाकात की थी. ब्यांजंकर का कहना था कि नेपाल और भारत के बीच सीमा को लेकर जो सुगौली संधि है, उसमें ब्रिटेन भी पक्षकार रहा है. ऐसे में सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ब्रिटेन को आगे आना चाहिए.

ब्रिटेन ने मदद करने से इंकार किया
ब्रिटेन के राजदूत फेन ने कहा कि यह मुद्दा नेपाल और भारत से संबंधित एक द्विपक्षीय मामला है और ब्रिटेन इसमें हस्तक्षेप करना नहीं चाहेगा. इसके बाद प्रधानमंत्री के सलाहकार वापस लौट गए.

साल 1816 में ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच सुगौली का समझौता हुआ था. इसमें दोनों देशों के बीच सीमा सर्वे को लेकर फैसला हुआ था. नेपाल इस समझौते को मानने को तैयार नहीं है. उसका कहना है कि इस समझौते में काठमांडू की कुछ जमीनों को भारत के हिस्से में दे दिया है. कालापानी इसका प्रमुख उदाहरण है.

रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार ब्यांजंकर ने ब्रिटेन के राजदूत से कहा कि आप उस वक्त मुख्य पक्षकार थे इसलिए आपको इस मसले पर बोलना चाहिए. आप अगर इसकी पहल करेंगे तो नेपाल और भारत के बीच समझौता हो सकता है.

सीमा विवाद पर बुरी तरह घिरे बालेन 

रविवार (31 मई) को नेपाल संसद (प्रतिनिधि सभा) में बोलते हुए बालेन शाह ने सीमा विवाद को लेकर विवादित बयान दिया. बालेन ने कहा कि मैं जब प्रधानमंत्री बना, तो मुझे पता चला कि नेपाल ने भी भारत के कुछ जमीनों पर कब्जा कर रखा है. बालेन के इस बयान को विपक्षी कम्युनिष्ट पार्टी ने राष्ट्रद्रोह करार दिया है.

वहीं नेपाल विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इस बयान को गलत करार दिया है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल के कुछ किसान भारत में खेती करते है. वहीं विपक्षी पार्टियों का कहना है कि नेपाल के प्रधानमंत्री इस बयान को लेकर माफी मांगें.
-Legend News

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