नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पहला पदक बिहार की माटी के लाल झंडू कुमार की बदौलत आया है. मेंस हैवीवेट (72 किग्रा) पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में झंडू कुमार ने अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पूरे देश को झूमने का मौका दे दिया. इस जीत के साथ ही उन्होंने 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पदकों का खाता भी आधिकारिक रूप से खोल दिया है. पैरा पावरलिफ्टिंग मेंस 72 किग्रा वेट कैटेगरी का यह फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और सांसें रोक देने वाला रहा. दुनिया भर से आए दिग्गज पावरलिफ्टरों के बीच झंडू कुमार ने शुरुआती दौर से ही अपनी पकड़ बनाए रखी.

इस स्पर्धा का गोल्ड मेडल नाइजीरिया के रिलवान इड्रिस (Riluwan Idris) ने 132.8 अंक बनाकर अपने नाम किया. इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग (Matthew Harding) 131.0 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे और उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया. भारत के झंडू कुमार (Jhandu Kumar) ने 130.9 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. अंकों के इस फासले को देखें तो यह बेहद करीबी मुकाबला था. झंडू मात्र 0.1 अंक से रजत पदक से चूके, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने जो ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया, वह स्वर्ण पदक से कम नहीं है. इसी स्पर्धा में भाग ले रहे एक अन्य भारतीय एथलीट सुधीर 114.1 अंकों के साथ छठे स्थान पर रहे.

बिहार के छोटे से गांव से कॉमनवेल्थ के मंच तक का सफर
झंडू कुमार का यह मेडल सिर्फ एक खेल की जीत नहीं है, बल्कि यह अदम्य साहस, अनगिनत रातों की मेहनत और कभी न हार मानने वाले जज्बे की जीत है. बिहार के एक साधारण परिवार से आने वाले झंडू के लिए यह सफर आसान नहीं था. संसाधनों की कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और शारीरिक चुनौतियों ने उनके रास्ते में कई बार रुकावटें डालने की कोशिश की. लेकिन झंडू के दिल में राष्ट्रध्वज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लहराने का जो सपना था, उसने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया.
गांव की तंग गलियों और कामचलाऊ जिम से शुरू हुआ यह सफर आज कॉमनवेल्थ गेम्स के पॉडियम तक पहुंच चुका है. जब झंडू कुमार गले में ब्रॉन्ज मेडल पहनकर पॉडियम पर खड़े हुए, तो उनकी आंखों में गर्व और खुशी के आंसू साफ देखे जा सकते थे.

भारतीय दल के लिए प्रेरणा की मशाल
कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े खेल आयोजनों में पहला पदक किसी भी देश के पूरे एथलीट दल के लिए एक ‘टोन सेट’ करने का काम करता है. झंडू कुमार के इस ब्रॉन्ज मेडल ने भारतीय दल में नया उत्साह और ऊर्जा फूंक दी है. पैरा-एथलीटों ने बार-बार यह साबित किया है कि अगर इरादे बुलंद हों तो कोई भी शारीरिक बाधा आपको अपनी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती. झंडू कुमार की यह ऐतिहासिक कामयाबी आने वाले दिनों में प्रतिस्पर्धा कर रहे अन्य भारतीय खिलाड़ियों को गोल्ड और अन्य पदक जीतने के लिए प्रेरित करेगी.
- Legend News

मिलती जुलती खबरें

Recent Comments

Leave A Comment

Don’t worry ! Your Phone will not be published. Required fields are marked (*).