रिपोर्ट : LegendNews
भोजशाला: अनुष्ठान कर मंदिर में स्थापित की मां वाग्देवी (सरस्वती माता) की प्रतीकात्मक प्रतिमा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में पूजा-पाठ जारी है. दूसरे दिन भी यानी रविवार सुबह हिंदू समाज के लोग बड़ी संख्या में ढोल बजाते और भजन गाते हुए मां वाग्देवी की प्रतिमा को सिर पर रखकर पहुंचे, जहां उन्होंने भोजशाला की यज्ञशाला को सजाया. फिर पूजा-पाठ अनुष्ठान कार्यक्रम कर मंदिर में मां वाग्देवी (सरस्वती माता) की प्रतीकात्मक प्रतिमा स्थापित की. बता दें कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद एएसआई ने भी शनिवार को नया आदेश जारी किया था, जिसके तहत भोजशाला में हिंदू समाज को बिना रोक-टोक के अनुमति मिलने लगी है.
इस दौरान पूजा-पाठ अनुष्ठान कार्यक्रम कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा भी कुर्ता-पजामा पहनकर शामिल हुए. इनके अलावा बड़ी संख्या में और भी लोग पहुंचे. इसी तरह शनिवार को भी बड़ी संख्या में लोग भोजशाला पहुंचे, जहां पूजा-अर्चना की.
6 अप्रैल से हाईकोर्ट ने रोज की थी सुनवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर अपना फैसला शुक्रवार को सुना दिया था. इस दौरान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से दलील सुनी और लंबी सुनवाई हुई. इसके अलावा एएसआई के सर्वे की रिपोर्ट भी सुनवाई में शामिल की गई, जिसके बाद कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर करार दिया था. हालांकि, कोर्ट ने बताया कि भोजशाला एएसआई के संरक्षण में ही रहेगी. एएसआई ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगभग ढाई साल पहले विवादित परिसर का सर्वेक्षण करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट 15 जुलाई 2024 को सौंपी थी. इस दौरान ASI ने भोजशाला परिसर में 98 दिनों तक वैज्ञानिक परीक्षण किया था. कोर्ट ने इस पर दोनों पक्षों से राय मांगी थी. फिर हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल से मामले में नियमित सुनवाई पर फैसला किया और 15 मई को फैसला सुना दिया.
एएसआई ने जारी किया नया आदेश
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने शनिवार शाम को भोजसाला से जुड़ा नया आदेश जारी किया और अपना पुराना आदेश (जो 2003 का दिया) निरस्त कर दिया. एएसआई ने अपने आदेश में भोजशाला को देवी वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर और एक संरक्षित स्मारक बताया है.
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