नई द‍िल्ली। उत्‍तर प्रदेश के IAS अधिकारी अनुराग यादव को पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर हुई वर्चुअल मीटिंग में मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त से भिड़ना भारी पड़ा. अनुराग यादव को बंगाल चुनाव के पर्यवेक्षक पद से हटा दिया गया है. उन्हें अब वापस यूपी बुला लिया गया है. चुनाव आयोग के दिल्ली दफ्तर में बुधवार को ये बैठक तीन घंटे लंबी चली. इस बैठक में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी, मुख्य सचिव, पर्यवेक्षक और राज्य के तमाम अधिकारियों को बुलाया था. वर्चुअल हुई इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारी भी थे. बैठक में अचानक उस वक्त सन्नाटा छा गया, जब सीईसी ने आईएएस अधिकारी अनुराग यादव से कहा- "आप वापस घर चले जाइए." 

IAS अधिकारी नहीं बता पाए, कितने पोलिंग बूथ हैं?
अनुराग यादव साल 2000 के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया, "करीब 11 बजे चुनाव आयोग की बैठक शुरू हुई, जिसमें राज्य में चुनाव की समीक्षा की जा रही थी. इसी दौरान करीब 12:30 बजे आयोग ने कूच बिहार दक्षिण के पर्यवेक्षक आईएएस अधिकारी अनुराग यादव से उनके विधानसभा में पड़ने वाली कुल पोलिंग बूथ की जानकारी मांगी. जिसकी जानकारी वह नहीं दे पाए. काफी देर जानकारी जुटाने के बाद जब वह बाले, तो सीईसी ने उनको डांट दिया. 

"आप हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं कर सकते"
चुनाव आयोग के अधिकारी का कहना था कि करीब 20 दिन विधानसभा में बिताने के बाद भी अगर मतदान केंद्रों की संख्या की जानकारी नहीं दे पाते, तो अधिकारी की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं. मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि जब सीईसी ने उन्‍हें डांटा, तो अनुराग यादव ने जवाब देते हुए कहा, "आप हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं कर सकते. हमने इस सेवा में अपने 25 साल दिए हैं. आप इस तरह से बात नहीं कर सकते." हालांकि, आयोग सूत्रों ने कहा कि तुंरत ही उन्हें पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया और उन्हें वापस आने को बोल दिया गया. 

अनुराग का विवादों से पुराना नाता
अनुराग यादव अभी प्रमुख सचिव पद के अधिकारी हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने 29 मार्च को पर्यवेक्षक के तौर पर उनकी नियुक्ति के 10 दिन बाद उनका तबादला समाज कल्याण और सैनिक कल्याण विभाग में कर दिया. जबकि उससे पहले वह सूचना एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव थे. अनुराग यादव के आईटी विभाग के प्रमुख सचिव के रहते एक विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद उनका ट्रांसफर किया गया था. दरअसल, एक कंपनी यूपी में 25000 करोड़ का निवेश कर रही थी, जबकि उसकी कुल संपत्ति 50 करोड़ भी नहीं थी. आईटी विभाग ने "एआई पुच" नामक कंपनी के साथ समझौता किया, जिसने राज्य में 25,000 करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया.
- Legend News

मिलती जुलती खबरें

Recent Comments

Leave A Comment

Don’t worry ! Your Phone will not be published. Required fields are marked (*).