वृंदावन के डालिमया बाग का सिर्फ एमओयू साइन करके हजारों करोड़ रुपए हड़प चुके भूमाफिया अब एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश में लगे हैं। इसके लिए वह नित नई साजिशें रच रहे हैं, और इन साजिशों के तहत इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं जिससे एक ओर इनके जाल में फंसे बैठे लोगों की उम्मीद न टूटे और दूसरी ओर नए निवेशकों को टोपी पहनाई जा सके। 
गौरतलब है कि योगीराज श्रीकृष्‍ण की क्रीड़ास्थली के बेशकीमती इलाके छटीकरा रोड पर स्‍थित डालमिया बाग से भूमाफिया द्वारा रातों-रात 454 हरे दरख्त काटे जाने का मामला जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के बाद सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने इस पर बेहद सख्‍त रुख अपनाते हुए आरोपियों पर न केवल भारी जुर्माना लगाया बल्कि किसी भी किस्म के निर्माण पर रोक के साथ-साथ पर्यावरण की भरपाई के लिए हजारों नए पेड़ लगाने का भी आदेश दिया। 
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में 9 बिंदुओं के जरिए यह स्पष्ट किया...  
1. 454 पेड़ों की प्रतिपूर्ति उसी भूमि पर वृक्षारोपण करके की जाएगी।
2. 9080 वृक्षों का रोपण आसपास के उपयुक्त स्थलों पर किया जाएगा, जिनमें 4540 पौधे मूल वृक्षों के स्थान पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण के रूप में तथा 4540 पौधे दंड स्वरूप लगाए जाएंगे।
3. प्रत्येक वृक्ष हेतु ₹1,00,000/- के हिसाब से ₹4,54,00,000/- (4 करोड़ 54 लाख रुपये मात्र) का न्यूनतम दंड भूमि स्वामी पर अधिरोपित किया गया है, जिसे वन विभाग के माध्यम से वृक्षारोपण में व्यय किया जाएगा।
4. उ. प्र. वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 के प्रावधानों के तहत अवैध वृक्ष कटान हेतु दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
5. संरक्षित वन क्षेत्र में बिना पूर्व अनुमति मार्ग निर्माण हेतु वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अंतर्गत अभियोजन चलेगा।
6. वन विभाग द्वारा समस्त अवैध लकड़ी की जब्ती एवं निस्तारण का कार्य किया जाएगा।
7. TTZ प्राधिकरण द्वारा न्यायालय के समस्त आदेशों के अनुपालन की त्रैमासिक रिपोर्ट पेश की जाएगी।
8. निर्माण पर प्रतिबंध रहेगा
9. अवमानना के लिए पृथक दंड पर भी विचार किया जाएगा। 

फिर NGT ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की रोशनी में अपने यहां लंबित याचिकाओं का निस्‍तारण करते हुए कहा, चूंकि डालिमया बाग से सैकड़ों हरे पेड़ काटे जाने पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सभी बिंदु कवर करता है इसलिए अब NGT के समक्ष इस विषय में कोई स्वतंत्र विवाद शेष नहीं रह जाता। 
NGT ने अपने आदेश में स्वयं सुप्रीम कोर्ट के आदेश (रिपोर्ट संख्या 35/2024 के अनुच्छेद 14) को शब्दशः उद्धृत करते हुए कहा कि हम रिपोर्ट संख्या 35/2024 के अनुच्छेद 14 में दी गई सिफारिशों को स्वीकार करते हैं। 
सूत्रों से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से सख्त निर्णय आने के बाद अब जबकि डालिमया बाग पर हाउसिंग प्रोजेक्ट खड़ा करने का सपना कभी पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा और उसके नाम पर हड़पी गई हजारों करोड़ रुपए की रकम भी खुर्द-बुर्द होती नजर आ रही है तो निवेशकों को गुमराह करने के लिए माफिया तरह-तरह के हथकंडे अपना रहा है। 
नई जानकारी के अनुसार माफिया के गुर्गे न केवल इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट से वह जल्द बड़ी राहत पा लेंगे इसलिए हाउसिंग प्रोजेक्ट का काम भी शीघ्र शुरू हो जाएगा, बल्कि वह नए निवेशकों को भी लालच दे रहे हैं कि वह पुराने रेट में सौदा करने का सुनहरा मौका न चूकें। 
दरअसल, इससे माफिया दोतरफा लाभ हासिल करने के प्रयास में है। प्रथम तो जिनका पैसा उसने हड़प रखा है वो पैसे के वापसी के लिए दबाव न बनाएं, और दूसरे नए निवेशकों को टोपी पहनाने में सफल होने पर बाजार में अपनी बर्बाद हो चुकी साख बचाने का काम हो जाए। 
माफिया के गुर्गों ने इसके लिए बाकायदा यह प्रचारित करना प्रारंभ कर दिया है कि गुरू कृपा हाउसिंग प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू होने वाला है क्योंकि अधिकांश कानूनी बाध्यताओं को पूरा किया जा चुका है। 
माफिया द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों का आलम यह है कि उसके गुर्गे अपनी आंखों से काम शुरू होते देखकर आने का दावा करते हैं जिससे शक की कोई गुंजाइश न रहे जबकि हकीकत इसके ठीक उलट है। 
हकीकत तो यह है कि डालमिया बाग में अब भी दूर-दूर तक दरख्तों के अवशेष पड़े देखे जा सकते हैं। वन विभाग का बोर्ड यथावत लगा है और उसके पीछे सन्नाटा पसरा है। 
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

 

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