रिपोर्ट : LegendNews
भारत के साथ तीस्ता नदी समझौते को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने दिया बयान
बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भारत के साथ तीस्ता नदी समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। रहमान ने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ तीस्ता नदी के पानी को लेकर समझौते के लिए अनंतकाल तक इंतजार नहीं कर सकता है। यह उस क्षेत्र के लोगों के लिए जीवन और मरण का सवाल है। इसके साथ ही उन्होंने इस क्षेत्र में विकास योजनाओं के लिए चीन के साथ बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई। खलीलुर रहमान ने कहा कि बांग्लादेश हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकता।
खलीलुर रहमान ने चीन की तीन दिवसीय यात्रा पर रवाना होने से पहले ढाका में पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान जब उनसे तीस्ता परियोजना पर बीजिंग में चर्चा पूछा गया तो उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह चीन के साथ बातचीत के एजेंडे में शामिल होगी। उन्होंने कहा, बांग्लादेश यूं ही हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकता। हमें अपना काम करना है।
चीन दौरे पर खलीलुर रहमान
बीजिंग दौर पर रहमान का चीनी विदेश मंत्री वांग यी और दूसरे सीनियर अधिकारियों से मिलने का कार्यक्रम है। यह जानना जरूरी है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अगले महीने यानी जून में चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं, जहां तीस्ता परियोजना को एक प्राथमिकता वाले विषय के रूप में पेश किया जाएगा।
तीस्ता पर खलीलुर रहमान की टिप्पणी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के सत्ता से हटने के बाद आई है। ममता बनर्जी को भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता समझौता के बीच रुकावट माना जाता है। 2011 में मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश समझौते पर सहमति बना चुके थे, लेकिन ममता बनर्जी के विरोध के कारण यह अंजाम तक नहीं पहुंच सका।
भारत का इंतजार अब बांग्लादेश की रणनीति नहीं
पश्चिम बंगाल में नई सरकार सत्ता में आने के बाद भारत और बांग्लादेश तीस्ता समझौते को फिर से शुरू करने पर विचार सकते हैं। खलीलुर रहमान ने भी इस विचार से सहमति जताई लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत के भीतर राजनीतिक सहमति का इतंजार करना अब ढाका की प्राथमिकता नहीं है।
तीस्ता परियोजना को प्राथमिकता देने को लेकर उन्होंने कहा, "यह हमारे प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता है। सबसे महत्वपूर्ण बात हमारे लोगों का हित है- बांग्लादेश फर्स्ट।"
भारत-बांग्लादेश के बीच तीस्ता विवाद क्या है?
तीस्ता नदी को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच चार दशकों से भी ज्यादा समय से विवाद है। 1983 में पानी के बंटवारे को लेकर एक अस्थायी समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत बांग्लादेश को सूखे मौसम में नदी के बहाव का 36 प्रतिशत हिस्सा दिया गया। भारत को 39 प्रतिशत हिस्सा मिला। लेकिन यह कभी भी स्थायी संधि नहीं बन पाया।
साल 2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले थे, जो उनकी ढाका यात्रा के दौरान होना था। इसमें भारत को बहाव का 42.5 प्रतिशत, जबकि बांग्लादेश को 37.5 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता। लेकिन उस समय पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नदी में साझा करने लायक पर्याप्त पानी नहीं है।
तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट पर चीन की नजर
इसके बाद शेख हसीना ने तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना शुरू की, जिसे तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट कहा गया। चीन और भारत दोनों की इसमें दिलचस्पी रही है। शेख हसीना चाहती थीं कि भारत इस परियोजना में आर्थिक मदद करे। 14 जुलाई 2024 को पद से हटाने जाने से कुछ दिन पहले हसीना ने कहा था कि चीन तो तैयार है, लेकिन मैं चाहती हूं कि इसे भारत ही करे।
इसके कुछ दिनों बाद 5 अगस्त 2024 को हसीना को व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद पद से इस्तीफा देना पड़ा और देश छोड़कर भागना पड़ा। उनके बाद आई मोहम्मद यूनुस की सरकार ने इस प्रोजेक्ट को लेकर चीन के साथ चर्चा शुरू की। चीन ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई और जल्द काम शुरू करने की बात कही। अब देखना है कि तारिक रहमान की सरकार प्रोजेक्ट पर किसके साथ आगे बढ़ने का फैसला करती है।
-Legend News

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