नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PMJAY) को शुरू करने के लिए कमर कस ली है. यह फैसला भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा राज्य विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के एक दिन बाद लिया गया है.

पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) राज्य में घोषणा की जाने वाली पहली हेल्थ स्कीम होगी. असल में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय दिवस के भाषण में यह भी कहा था कि बीजेपी की अगुवाई वाली पश्चिम बंगाल सरकार की पहली कैबिनेट आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की घोषणा करेगी.

हालांकि पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत को लागू करने से इंटीग्रेशन में मुश्किलें आ सकती हैं, खासकर बेनिफिशियरी डेटाबेस और हॉस्पिटल नेटवर्क को अलाइन करने में. उन्होंने कहा, 'इससे देश भर के बड़े हॉस्पिटल तक पहुंच भी खुल सकती है और राज्य के हेल्थकेयर सिस्टम में एक्स्ट्रा सेंट्रल फंडिंग आ सकती है.'

पश्चिम बंगाल अब तक अकेला ऐसा राज्य था जिसने इस स्कीम से बाहर रहने का ऑप्शन चुना था और इसके बजाय अपना खुद का प्रमुख कार्यक्रम, स्वास्थ्य साथी चलाने का फैसला किया था. ये बड़े हेल्थ प्रोटेक्शन मॉडल आउट-ऑफ-पॉकेट हेल्थकेयर खर्च को कम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, लेकिन ये स्केल, स्ट्रक्चर और फंडिंग मैकेनिज्म में अलग-अलग हैं.

केंद्र द्वारा 2018 में शुरू की गई आयुष्मान भारत को दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी फंडेड हेल्थ एश्योरेंस स्कीम माना जाता है. यह माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए हर परिवार को सालाना 5 लाख रुपये का हेल्थ कवर देती है.

यह स्कीम आर्थिक रूप से कमजोर आबादी को टारगेट करती है, जिन्हें मुख्य रूप से सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसस (SECC) डेटाबेस के आधार पर कमी और काम के क्राइटेरिया के जरिए पहचाना जाता है. खास बात यह है कि हाल ही में इस स्कीम को इनकम की परवाह किए बिना 70 साल और उससे ज़्यादा उम्र के सभी नागरिकों को शामिल करने के लिए बढ़ाया गया है, जिससे इसका कवरेज बेस काफी बढ़ गया है.

पश्चिम बंगाल सरकार ने 2016 में स्वास्थ्य साथी नाम की एक स्कीम शुरू की थी. यह स्कीम राज्य में ज्यादा यूनिवर्सल तरीका अपनाती है. यह स्कीम आयुष्मान भारत की तरह ही हर परिवार को हर साल 5 लाख रुपये का बेसिक हेल्थ कवर देती है, और यह किसी खास सोशियो-इकोनॉमिक कैटेगरी तक सीमित नहीं है.

इसकी एक खास बात यह है कि हेल्थ कार्ड परिवार की महिला मुखिया के नाम पर जारी किया जाता है, जिसका मकसद महिलाओं को मजबूत बनाना और घर के लेवल पर हेल्थकेयर सर्विस तक बेहतर पहुंच पक्का करना है. पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि दोनों स्कीम का हेल्थकेयर में फाइनेंशियल प्रोटेक्शन का एक ही मकसद है, लेकिन उनके तरीके अलग-अलग पॉलिसी प्रायोरिटी दिखाते हैं- टारगेटेड वेलफेयर बनाम ज़्यादा लोगों को शामिल करना.

आने वाले महीने यह तय करने में अहम होंगे कि पश्चिम बंगाल इस बदलाव से कैसे निपटता है और क्या एक हाइब्रिड मॉडल अपने लोगों के लिए दोनों दुनिया की सबसे अच्छी चीजें दे सकता है. दिलचस्प बात यह है कि फंडिंग स्ट्रक्चर दोनों स्कीमों के बीच एक बड़ा अंतर दिखाते हैं.

आयुष्मान भारत केंद्र और राज्यों के बीच कॉस्ट-शेयरिंग मॉडल पर काम करता है, आमतौर पर 60:40 के रेश्यो में (नॉर्थईस्ट और स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों के लिए 90:10). दूसरी ओर स्वास्थ्य साथी को पूरी तरह से पश्चिम बंगाल सरकार फंड करती है, जिससे राज्य को स्कीम पर पूरा एडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल कंट्रोल मिलता है.

इसके अलावा एक और बड़ा अंतर पोर्टेबिलिटी में है. आयुष्मान भारत पूरे देश में पोर्टेबिलिटी देता है, जिससे बेनिफिशियरी पूरे भारत में किसी भी एम्पैनल्ड हॉस्पिटल में इलाज करा सकते हैं. यह फीचर खासकर माइग्रेंट वर्कर्स और उन परिवारों के लिए फायदेमंद है जो अपने होम स्टेट के बाहर इलाज करवाना चाहते हैं. जबक‍ि स्वास्थ्य साथी में इंटरस्टेट पोर्टेबिलिटी लिमिटेड है, जिससे राज्य के नेटवर्क के अंदर के हॉस्पिटल तक ही एक्सेस सीमित है.'

हॉस्पिटल एम्पैनलमेंट और पैकेज रेट भी अलग-अलग हैं. आयुष्मान भारत में राज्यों के बीच एक स्टैंडर्ड पैकेज रेट सिस्टम है, जिसका मकसद एक जैसापन बनाए रखना और कॉस्ट कंट्रोल करना है. जबकि स्वास्थ्य साथी राज्य को पैकेज रेट और हॉस्पिटल की भागीदारी तय करने में ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देता है, जिससे पश्चिम बंगाल में प्राइवेट हॉस्पिटल ज़्यादा शामिल हुए हैं, लेकिन लागत में अंतर को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं.

स्वास्थ्य साथी के भविष्य को लेकर भी सवाल हैं. राज्य या तो इस स्कीम को आयुष्मान भारत के साथ मिला सकता है या दोनों को एक साथ चला सकता है, जैसा कि कुछ दूसरे राज्यों में देखा गया है जिन्होंने अतिरिक्त फ़ायदों के साथ सेंट्रल कवरेज को बढ़ाया है.
- Legend News

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