रूस ने एक बार फिर कहा है कि अगर भारत को तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर किल्लत हुई तो वह भारत को उसकी कुल एनर्जी डिमांड को पूरा करेगा। रूस ने यह भरोसा फिर से तब दिया है, जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है। वहीं, ईरान ने भी होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का एलान किया है, जहां से भारत के करीब 50 फीसदी जहाजी तेल टैंकर गुजरते रहे हैं। ऐसे में रूस भारत की मदद के लिए आगे आया है। रूस पहले भी कई मौकों पर भारत का मददगार साबित होता रहा है। बीते साल नई दिल्ली के दौरे पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत को एनर्जी सप्लाई जारी रखने का भरोसा दिया था। 
जंग के बीच रूस ने फिर दिया यह बड़ा भरोसा
द मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार रूसी संघ के दूतावास के एक अधिकारी की ओर से जारी बयान में कहा गया है-हम भारत की ऊर्जा जरूरतों की मांग को पूरा करने के लिए तैयार हैं।
रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भी कहा है कि हमने हमेशा भारत के लिए तेल आपूर्ति खुली रखी है।
एनर्जी सप्लाई में बाधा के बावजूद रूस भारत की यह मांग पूरी करता करेगा। यह बयान उस वक्त आया है, जब कतर एनर्जी ने LNG (तरल नेचुरल गैस) और संबंधित चीजों की सप्लाई 2 मार्च तक रोक दी है।
कतर ने यह फैसला उस वक्त किया है जब ईरान ने कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी और मीसैयद इंडस्ट्रियल सिटी की मुख्य फैसिलिटी पर ड्रोन से हमले किए थे। 
होर्मुज स्ट्रेट भी बंद होने से पड़ेगा भारत पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की एनर्जी सप्लाई को लेकर नई दिल्ली की चिंता तब बढ़ी, जब ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का ऐलान किया। यह स्ट्रेट ओमान और ईरान के बीच है।
केप्लर के अनुसार, इस स्ट्रेट से पूरी दुनिया का 31 फीसदी जहाजी क्रूड ऑयल टैंकर गुजरते हैं। यानी करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल हर दिन इसी खाड़ी से गुजरता है। भारत पश्चिम एशिया से आने वाले तेल और LNG पर बहुत हद तक निर्भर है।
भारत ने पेट्रोलियम की जरूरतों पर क्या कहा है
यूक्रेन से युद्ध के बाद रूस से भारत ने काफी मात्रा में सस्ता तेल मंगाना शुरू किया था। हालांकि, पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने बीते सोमवार को कहा है कि भारत के पास पर्याप्त क्रूड रिजर्व है और उसके पास पेट्रोल-डीजल और विमानन टर्बाइन ईंधन (ATF) समेत जरूरी ईंधन का पर्याप्त स्टॉक है।
इससे क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान शॉर्ट टर्म सप्लाई में बाधा से निपटने में मदद मिलेगी। भारत ने अपनी आबादी के लिए सस्ता तेल और उपलब्धता दोनों ही सुनिश्चित कर लिया है। भारतीय कंपनियां अब अपनी एनर्जी सप्लाई के लिए होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं।
भारत के पास क्या हो सकते हैं विकल्प
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार अपनी घरेलू जरूरतों की खातिर ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ईंधन निर्यात पर कुछ रोक लगा सकता है। सरकार इस पर विचार भी कर सकती है।
सरकार अपनी घरेलू गैस और पाइप सप्लाई को बनाए रखने के लिए औद्योगिक यूजर्स को दूसरे तरह के ईंधन के इस्तेमाल के लिए भी कह सकती है।
भारत रूस से कितना ऑयल मंगाता रहा है
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत बीते कुछ साल से बड़ी मात्रा में रूस से तेल मंगाता रहा है। खासतौर पर 2022 में जब रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद से इस ऑयल इंपोर्ट में और इजाफा हुआ।
अगस्त, 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने सोशल मीडिया एक्स पर यह दावा किया था कि यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से 1 फीसदी से भी कम तेल आयात करता था, जो अब बढ़कर 35-40 फीसदी तक जा पहुंचा है।
अमेरिका से ट्रेड एग्रीमेंट पर दस्तखत होने के बाद से भारत, रूस से तेल आयात पर पाबंदी लगाने पर राजी हो गया था। इससे पहले रूसी तेल आयात के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया था।
भारत ने रूस से तेल आयात कम कर दिया
फरवरी, 2026 में ट्रंप ने यह ऐलान किया था कि भारत अब वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा। तब से अब तक भारत ने रूस से तेल खरीदना बेहद कम कर दिया है। फरवरी में ही रूस से तेल आयात 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था, जो पहले के मुकाबले करीब-करीब आधा है। यह सितंबर, 2022 में सबसे निचले स्तर पर था। 
-Legend News

मिलती जुलती खबरें

Recent Comments

Leave A Comment

Don’t worry ! Your Phone will not be published. Required fields are marked (*).