अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा फाइनल में दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग को 4-0 से हराकर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। उनके गोल्ड के साथ भारत का बॉक्सिंग अभियान तीन स्वर्ण और तीन कांस्य समेत छह पदकों के साथ खत्म हुआ। परवीन हुड्डा और लवलीना बोरगोहेन ने भी स्वर्ण जीते।

भारतीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स में पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। नागोया के निशियो जिम्नेजियम में खेले गए फाइनल में अंकुश ने दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग को 4-0 से हराया। अंकुश की जीत के साथ ही एशियाई खेलों में भारत का मुक्केबाजी अभियान तीन स्वर्ण और तीन कांस्य पदकों के साथ खत्म हुआ। भारत ने कुल छह पदक अपने नाम किए।

अंकुश ने शुरू से बनाया दबदबा
फाइनल में अंकुश ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने पहले राउंड में तेजी और सटीक पंचों के दम पर किम पर दबाव बनाया। भारतीय मुक्केबाज ने यह राउंड 4-1 से अपने नाम किया। किम को पहले राउंड में चेतावनी के कारण एक अंक की कटौती भी झेलनी पड़ी। दूसरे राउंड में अंकुश का प्रदर्शन और प्रभावी रहा। उन्होंने अपने 1-2 पंचों के साथ मौके बनाए और कोरियाई मुक्केबाज के हमलों का जवाब काउंटर पंच से दिया। किम ने कुछ अच्छे पंच लगाए, लेकिन अंकुश की रक्षात्मक तकनीक और काउंटर अटैक के सामने वह लगातार पिछड़ते गए। दूसरे राउंड में सभी पांच जजों ने अंकुश को बढ़त दी।

तीसरे राउंड में भी नहीं बदली तस्वीर
तीसरे राउंड में भी अंकुश ने अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया। उन्होंने डिफेंस और अटैक का बेहतरीन संतुलन बनाए रखा। किम के हमलों से बचते हुए भारतीय मुक्केबाज ने सही समय पर काउंटर पंच लगाए। अंकुश ने तीसरा राउंड भी 4-1 से जीत लिया। इस तरह मुकाबले का फैसला 4-0 से उनके पक्ष में रहा। चार जजों ने अंकुश को 30-26 से विजेता माना, जबकि एक जज ने दोनों मुक्केबाजों का स्कोर 28-28 रखा।

80 किग्रा वर्ग में भारत का पहला एशियाई खेल स्वर्ण
अंकुश की यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने एशियाई खेलों के 80 किग्रा वर्ग में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने फाइनल में अपनी रक्षात्मक मजबूती, तेज रिफ्लेक्स और काउंटर पंचिंग का शानदार इस्तेमाल किया। अंकुश का सफर कम उम्र में ही तेजी से आगे बढ़ा है। हिसार, हरियाणा में 13 अगस्त 2005 को जन्मे अंकुश ने अपने पिता की सलाह पर मुक्केबाजी शुरू की। इससे पहले वह करीब तीन साल तक कबड्डी खेलते थे। मुक्केबाजी में आने के बाद उन्होंने अपनी रक्षात्मक क्षमता और काउंटर पंचिंग के लिए पहचान बनाई।

राष्ट्रमंडल खेलों में भी जीता था गोल्ड
अंकुश के लिए 2026 का साल बेहद सफल रहा है। एशियन गेम्स से पहले उन्होंने ग्लासगो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। वहां उन्होंने इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू के खिलाफ मुकाबले में वापसी करते हुए गोल्ड अपने नाम किया था। इसके अलावा अंकुश ने चेकिया में हुए ग्रां प्री उस्ती नाद लाबेम में भी स्वर्ण पदक जीता। 2025 में नई दिल्ली में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग कप के वैश्विक फाइनल में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था। 2023 में एशियन यूथ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी वह रजत पदक जीत चुके हैं।
- Legend News

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