मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने आज शुक्रवार की सुबह उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े कई ठिकानों पर अचानक धावा बोल दिया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 10 से 12 अलग-अलग स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. जांच एजेंसी के निशाने पर मुख्य रूप से रिलायंस पावर और उससे जुड़े लोगों के आवासीय और पंजीकृत कार्यालय हैं. हालांकि, ईडी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि यह पूरी कवायद रिलायंस पावर से जुड़े कुछ संदिग्ध लेन-देन और भारी-भरकम फंड ट्रांसफर की गहराई से पड़ताल करने के लिए की जा रही है.

जांच की आंच यहां तक कैसे पहुंची
पूरे विवाद की जड़ें रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े उस लोन से जुड़ी हैं, जो भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और यस बैंक सहित कई अन्य वित्तीय संस्थानों से लिया गया था. आरोप बेहद गंभीर हैं. कहा जा रहा है कि इन बैंकों से कर्ज के रूप में ली गई धनराशि को नियमों को ताक पर रखकर अन्य संबंधित संस्थाओं और विदेशी खातों में डायवर्ट किया गया. बात सिर्फ स्वदेशी बैंकों तक सीमित नहीं है. इस मामले में चीनी सरकारी बैंकों से जुड़े 13,558 करोड़ रुपये के भारी जोखिम का भी खुलासा हुआ है. यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच साल 2019 में दर्ज की गई सीबीआई की एक एफआईआर पर आधारित है. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और स्पष्ट निर्देशों के बाद, ईडी ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जो अब इस पूरे मामले की परतें उधेड़ रहा है.

लगातार कसता शिकंजा
जांच एजेंसियों का यह दबाव हाल ही में अचानक नहीं बढ़ा है. पिछले ही महीने, यानी फरवरी 2026 में, ईडी ने एक सख्त कदम उठाते हुए अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आलीशान घर ‘अबोड’ को अस्थायी तौर पर कुर्क कर लिया था. इस शानदार बंगले की अनुमानित कीमत ही 3,500 करोड़ रुपये के आसपास आंकी गई है. यह बड़ी कार्रवाई आरकॉम से जुड़े उसी 40,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले का हिस्सा थी, जिसकी जांच लंबे वक्त से चल रही है. इस जब्ती के साथ ही, अंबानी समूह की अब तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल आंकड़ा 15,700 करोड़ रुपये को पार कर चुका है.- Legend News

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