मथुरा। के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल, मथुरा में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बेहद धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर कॉलेज परिसर में विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा को गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच प्रतिष्ठापित किया गया।

 कॉलेज के छात्र-छात्राओं और फैकल्टी मेम्बर्स ने पारम्परिक परिधानों में 'गणपति बप्पा मोरया' के जयघोष के साथ विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेशजी का स्वागत किया।

मूर्ति स्थापना के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती की गई, जिसमें सभी ने संस्थान और देश की सुख, समृद्धि की कामना की। इस भक्तिमय माहौल में विद्यार्थियों ने गणपति बप्पा मोरया के भजनों पर शानदार नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। केडी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. रामकिशोर अग्रवाल तथा प्रति-कुलाधिपति मनोज अग्रवाल ने सभी को गणेश चतुर्थी शुभकामनाएं देते हुए गणपति बप्पा मोरया के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

कुलाधिपति डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि श्रीगणेशजी के प्रत्येक अंग हमें बुद्धिमानी से सोचने, दूरदर्शी बनने, केवल शुभ और सकारात्मक बातों को ग्रहण करने, अनुशासन से प्रेमपूर्वक रहने का संदेश देते हैं। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जब इंसान देह-अभिमान और अहंकार से ऊपर उठकर आत्म-अभिमान में स्थित होता है, तब वह स्वयं का विघ्न-विनाशक बन जाता है।

प्रति-कुलाधिपति मनोज अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि भगवान श्रीगणेश को हिन्दू धर्म में प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि-विद्या का देवता माना जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्मांड की परिक्रमा की प्रतियोगिता में गणेशजी ने अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) की सात परिक्रमा कर उन्हें ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड मान लिया था। इसी बुद्धि और भक्ति के कारण गणेशजी को सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने का वरदान मिला।   

केडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने छात्र-छात्राओं को गणेश चतुर्थी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने भगवान श्रीगणेश के स्वरूप, पर्व के आयोजन और भारतीय संस्कृति में गणेश चतुर्थी की भूमिका के बारे में बताया। के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल की प्राचार्या डॉ. नवप्रीत कौर ने छात्र-छात्राओं को पर्व की परम्पराओं और इससे मिलने वाले प्रेरणादायी संदेशों से अवगत कराते हुए कहा कि श्रीगणेशजी बुद्धि और विवेक का स्वरूप हैं। श्रीगणेशजी का हाथी जैसा विशाल मस्तिष्क, व्यापक सोच एवं उत्कृष्ट क्रियाकलापों की प्रस्तुति करता है। इनके विशाल कान भारतीय संस्कृति को समझने एवं सिखाने की प्रस्तुति देते हैं।

आरती के समापन के बाद उपस्थित सभी डॉक्टरों, स्टाफ सदस्यों और छात्र-छात्राओं को मोदक और विशेष प्रसाद वितरित किया गया। विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की प्राण-प्रतिष्ठा में संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी नीरज छापड़िया, देवेश चाहर, सचिन राजपूत, उत्सव पांडेय, अंकुश, निश्चल, कोविद आदि का विशेष सहयोग रहा।

- Legend News

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