अमेरिकी उपराष्ट्रपति ईरान के साथ अहम शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद में मौजूद हैं। उसी समय वॉशिंगटन मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है। अमेरिकी सेनाएं लगातार अपनी-अपनी जगहों पर तैनात हो रही हैं। कूटनीति और सैन्य तैनाती का एक साथ होना ये दिखाता है कि इस पूरे मामले में जो दिख रहा है, पर्दे के पीछे उससे बहुत कुछ ज्यादा चल रहा है।
अमेरिकी सेना का बढ़ता जमावड़ा
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट से पता चलता है कि अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में लगातार अपना जमावड़ा बढ़ा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइटर जेट और हमलावर विमान पहले ही क्षेत्र में पहुंच चुके हैं।
इसके अलावा अमेरिकी सेना की 28वीं एयरबोर्न डिवीजन के 1500 से 2000 सैनिकों को आने वाले दिनों तैनात किए जाने की उम्मीद है।
अमेरिकी नेवी में बड़ा मूवमेंट चल रहा है। USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश कैरियर स्ट्राइक ग्रप अटलांटिक महासागर पार कर रहा है।
दूसरी तरफ USS बॉक्सर एम्फीबियस ग्रुप प्रशांत महासागर की ओर से बढ़ रहा है। दोनों ही खाड़ी क्षेत्र की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां पहुंचने में एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग सकता है।
वर्तमान में मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों 50000 के पार हो गई है। यह 40000 के सामान्य स्तर से काफी ज्यादा है।
ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं
अमेरिका और ईरान आज शनिवार को इस्लामाबाद में बातचीत भले कर रहे हैं, लेकिन तेहरान को वॉशिंगटन पर भरोसा नहीं है। इस्लामाबाद में पहुंचने के बाद ईरानी वार्ता दल का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि ईरान अच्छी नीयत से बातचीत में शामिल हो रहा है, लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि 'दुर्भाग्य से अमेरिकियों के साथ बातचीत का हमारा अनुभव हमेशा नाकामी और वादों के उल्लंघन में ही खत्म हुआ है।' 
ट्रंप की ईरान को धमकी
इस्लामाबाद में कूटनीतिक प्रयासों के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि मिलिट्री कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला है। उन्होंने कहा, कि अमेरिका के जंगी जहाजों पर सामान लादा जा रहा है और कूटनीतिक नाकाम होने पर उनका इस्तेमाल किया जा सकता है। 
अमेरिका की दोनों विकल्पों की तैयारी
बातचीत और सैन्य तैनाती पर एक साथ जोर देना ट्रंप प्रशासन की दोहरी रणनीति के बारे में इशारा करता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हमले की तैयारी ही हो। इसका इस्तेमाल बातचीत की मेज पर अमेरिका के लिए दबाव बनाने के लिए भी किया जा सकता है। साथ ही यह इस संभावना की तैयारी भी है कि बातचीत टूट सकती है। 
-Legend News

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