प्रयागराज। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए 26 नामों की सिफारिश की है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की ओर से केंद्र सरकार को भेजे गए 26 नामों में 12 वकील और 14 ज्यूडिशियल अफसर शामिल हैं. संस्तुति के बाद नए जजों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो जाएगा. उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी अदालत में नए जजों की नियुक्ति से सालों से लंबित चल रहे मुकदमों में तेजी आने की उम्मीद बंधेगी.

वकीलों में हाईकोर्ट के अलावा सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले अधिवक्ता भी शामिल हैं. जिन अधिवक्ताओं के नाम की जज की नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई है, उनमें विवेक सरन, अदनान अहमद, विवेक कुमार सिंह, गरिमा प्रसाद, सुधांशु चौहान, अवधेश कुमार चौधरी, स्वरूपमा चतुर्वेदी, अपर शासकीय अधिवक्ता जेके उपाध्याय, सिद्धार्थ नंदन, मुख्य स्थायी अधिवक्ता कुणाल रवि सिंह, इंद्रजीत शुक्ल व सत्यवीर सिंह शामिल हैं.

इनके भी भेजे गए नाम 

इसी प्रकार जिला जज स्तर के जिन एचजेएस 14 न्यायिक अधिकारियों को नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की है, उनमें डॉ. अजय कुमार द्वितीय, चवन प्रकाश, दिवेश चंद्र सावंत, प्रशांत मिश्र प्रथम, तरुण सक्सेना, रजिस्ट्रार जनरल राजीव भारती, पदम नारायण मिश्र, लक्ष्मीकांत शुक्ल, जय प्रकाश तिवारी, देवेंद्र सिंह प्रथम, संजीव कुमार, वाणी रंजन अग्रवाल, अचल सचदेव एवं बबीता रानी शामिल हैं. इन नामों पर संस्तुति के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट को नए जज मिल जाएंगे. इससे मुकदमों के निस्तारण में भी तेजी आएगी. वादकारियों को भी इससे काफी सहूलियत मिलेगी.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 11.85 लाख केस पेंडिंग 

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 11.85 लाख केस पेंडिंग हैं. इनमें कई मुकदमे 30 साल से ज्यादा पुराने हैं. इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट में रोज औसतन 1000 नए मुकदमे भी दायर हो रहे हैं. इससे कोर्ट में मुकदमों का अंबार लग गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में 160 जजों के पद स्वीकृत हैं. इसकी तुलना में 87 के करीब ही जज काम कर रहे हैं, जबकि कई खाली पड़े हैं. मुकदमों का निस्तारण न होने से वादकारियों को परेशान होना पड़ रहा है.

30 लाख जनता पर हाईकोर्ट में एक जज 

एडवोकेट शाश्वत आनंद के अनुसार कई विधि आयोग और न्याय मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक हर 10 लाख की जनसंख्या पर 50 जजों की नियुक्ति होनी चाहिए. इस हिसाब से 20 हजार जनता पर एक जज होना चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में 30 लाख की जनता पर एक जज हैं. अगर हाईकोर्ट के सभी खाली पदों को भर भी दिया जाए तो 160 जज भी कम पड़ जाएंगे. जनसंख्या के हिसाब से यह औसत कम है.

- Legend News

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