रिपोर्ट : LegendNews
कृषि वैज्ञानिकों ने खोजा सब्जियों को प्रोसेस करने का सुरक्षित तरीका, युवाओं को दे रहे हैं ट्रेनिंग
वाराणसी। खेती करना अब किसानों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है, क्योंकि खेतों में उनकी बहुत सारी सब्जियां बर्बाद हो जाती है. कई बार सीजन में फसलों की अधिक उपलब्धता उनका नुकसान करा जाती है. ऐसे में उन्हें अपनी फसलों को मंडियों में, खेतों में फेंकनी पड़ती है या फिर लागत से भी कम पैसों में बेचना पड़ता है, लेकिन अब इन सब्जियों का प्रयोग अलग तरीके से भी किया जा सकता है. इससे न सिर्फ सेहत को ठीक किया जा सकता है, बल्कि एक बेहतर स्टार्टअप के रूप में सब्जियों का प्रयोग किया जा सकता है.
वाराणसी में कृषि वैज्ञानिकों ने इसे लेकर एक नई शुरुआत की है. इसके लिए ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें प्रोसेसिंग से लेकर पैकेजिंग और मार्केटिंग करना सिखाया जा रहा है. इस प्रोसेसिंग में हरी सब्जियां जैसे गाजर, मूली, भिंडी, करेला आदि को प्रोसेस करके रखा जा रहा है. उसके बाद उसे ऑफ सीजन में अच्छी कीमतों पर सेल किया जा रहा है.
सब्जियों का किया जा सकता है मूल्य संवर्धन
डॉ. स्वाति शर्मा बताती हैं कि साल 2026 ‘इंटरनेशनल इयर ऑफ वीमेन फॉर्मर्स’ है. हम लोग तुराई उद्यान प्रबंधन की बात करते हैं, मूल्य संवर्धन की बात करते हैं. जब किसानों के नुकसान की बात आती है तो आंकड़ों में देखेंगे कि 20 से 25 प्रतिशत तक का नुकसान हो जाता है. ऐसे में पैसों की बर्बादी होती ही है. साथ ही, जो मेहनत लगी है, सब्जियों का, जो पोषण है, वह भी बर्बाद होता है. अगर हम पत्ता गोभी की बात करें, तो इसे कोल्ड स्टोरेज में जीरो डिग्री सेल्सियस तापमान पर अधिक से अधिक एक महीने तक रख सकते हैं. अगर इसी को हम सुखाकर रखेंगे तो इससे सीधे सब्जी बनाने में उपयोग कर सकते हैं.
अनुसंधान संस्थान में ले सकते हैं प्रशिक्षण
डॉ. स्वाति शर्मा ने बताया कि हमारे देश में टमाटर बड़ी मात्रा में बर्बाद हो जाता है. कई बार टमाटर सॉस बनाने के लायक भी नहीं होते हैं. ऐसे में हम लोग टमाटर का पाउडर बनाकर रख सकते हैं, जिसे सब्जियों में उपयोग कर सकते हैं. गाजर का उपयोग चिप्स के रूप में कर सकते हैं. इसे कॉर्नफ्लेक की तरह दूध में डालकर भी खाया जा सकता है. यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी होता है. इसमें फाइबर बहुत होता है. इसे आराम से 06 महीने तक रखा जा सकता है. इसे तैयार करने के लिए भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में इसका प्रशिक्षण दिया जाता है. दो से तीन महीने के अंतराल पर प्रशिक्षण ले सकते हैं.
महिला या पुरुष शुरू कर सकते हैं अपना स्टार्टअप
डॉ. स्वाति शर्मा कहती हैं कि जो भी महिला कृषक या पुरुष अपना स्टार्ट अप शुरू करना चाहते हैं, उनका हमारे संस्थान में स्वागत है. निदेशक से अनुमित लेकर यहां पर प्रशिक्षण लिया जा सकता है. अगर इसकी शुरुआत अकेले करना चाहते हैं तो इसके लिए आने वाली मशीनें थोड़ी महंगी पड़ सकती है. अगर एक एफपीओ बनाकर 10-20 लोग मिलकर इसे व्यवसाय के रूप में शुरू करते हैं तो एक यूनिट शुरू कर सकते हैं. कटिंग के लिए, ड्रायर के लिए, पल्पिंग आदि के लिए मशीनें लेने के बाद उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. साथ ही साथ, अपने बनाए उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग भी कर सकते हैं.
महिलाओं को प्रशिक्षण देकर बनाया सशक्त बनाया जा रहा है: डॉ. श्रेया बताती हैं कि तुड़ाई उद्यान प्रबंधन को लेकर हम कार्य कर रहे हैं. इसमें महिलाओं को सशक्त करने के लिए भी कार्य किया जा रहा है. अगर हम महिलाओं को प्रशिक्षण देकर फसलों का निर्जलीकरण किया जा सकता है. वे सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) या किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से वे कार्य कार्य सकेंगी. साथ ही, उत्पादों की मार्केटिंग भी कर सकेंगी. जब वे इनकी बिक्री करेंगे तो महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी और वे अपनी और अपने उत्पाद की पहचान बना सकेंगी.
सरकार देती है सब्सिडी
डॉ. श्रेया बताती हैं किइसके लिए किसानों की अलग-अलग माध्यमों से ट्रेनिंग कराई जाती है. इससे वे बड़े स्तर पर या छोटे स्तर पर उत्पाद बनाना रही है. जिनके पास अधिक सुविधा नहीं है, तो वे सरकार द्वारा सब्सिडी के माध्यम से उपकरण व मशीनें लेकर अपना काम शुरू कर सकती हैं. फूड प्रोसेसिंग फसलों का एक बेहतर प्रबंधन है. यह न सिर्फ एक बेहतर मुनाफा दे सकता है, बल्कि किसानों के लिए एक बेहतर स्टार्टअप का विकल्प भी बन सकता है. वे अपनी फसलों (सब्जियां आदि) को रीस्टोर कर एक बेहतर उत्पाद के रूप में बाजार में प्रस्तुत कर खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकती हैं.
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