मुंबई। देश में बैंक लोन न चुकाने वाले बड़े कारोबारियों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी हो रही है. एस्सेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के मामले ने पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है. महज कुछ करोड़ रुपये देकर हजारों करोड़ का कर्ज चुकाने के खेल को रोकने के लिए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (IBBI) ने कमर कस ली है. IBBI ने चार बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है. ये बदलाव खास तौर पर उन लोगों को रोकेंगे जो अपने करीबियों का फायदा उठाकर भारी-भरकम कर्जे से बच निकलते हैं.

सुभाष चंद्रा केस ने बढ़ाई सख्ती
असल में ये पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब 25 अगस्त को NCLT की एक सिंगल बेंच ने सुभाष चंद्रा को एक बड़ी राहत दी. उन पर कुल 22,006.57 करोड़ रुपये का दावा था, लेकिन सेटलमेंट सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये में मंजूर कर लिया गया. इतनी बड़ी छूट ने बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मचा दिया. बैंकों ने आरोप लगाया कि गारंटर के करीबियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके इस प्लान को पास कराया है. इसके बाद 1 सितंबर को पांच जजों की बेंच ने इस फैसले पर रोक लगा दी. इसी भारी विवाद के बाद IBBI को दिवालिया नियमों में बदलाव करने की जरूरत महसूस हुई.

IBBI के 4 बड़े प्रस्तावों से बदलेगा सिस्टम
IBBI ने जो ड्राफ्ट तैयार किया है, उसमें चार अहम बातें शामिल हैं.

पहला प्रस्ताव वोटिंग अधिकार को लेकर है. अब अगर कोई क्रेडिटर, गारंटर से जुड़ा हुआ (रिलेटेड पार्टी) है, तो उसे रीपेमेंट प्लान पर वोट करने का अधिकार नहीं होगा. फिलहाल सिर्फ एसोसिएट को ही वोटिंग से रोका जाता है, लेकिन रिलेटेड पार्टी का दायरा बड़ा होने से अब कोई भी करीबी व्यक्ति वोटिंग में हेरफेर नहीं कर पाएगा.
दूसरा प्रस्ताव रेजोल्यूशन प्रोसेस के दौरान होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए है. अब रेजोल्यूशन प्रोफेशनल को ये जांचना होगा कि गारंटर ने कहीं अपनी संपत्ति कम कीमत पर तो नहीं बेची या किसी तरह का कोई गलत ट्रांजैक्शन तो नहीं किया. ये रिपोर्ट वोटिंग से पहले देनी होगी.
तीसरा बड़ा बदलाव गारंटर की संपत्ति की कीमत तय करने को लेकर है. अब एक रजिस्टर्ड वैल्युअर रखा जाएगा जो संपत्ति की सही कीमत तय करेगा.
चौथा प्रस्ताव फैसले लेने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए है. अगर किसी प्लान में दावों से बहुत कम रकम दी जा रही है, तो उसकी पूरी वजह, आपत्तियों के साथ रिकॉर्ड में दर्ज करना अनिवार्य होगा.
CBI ने भी कसा सुभाष चंद्रा पर शिकंजा
IBBI की सख्ती के साथ ही सुभाष चंद्रा पर कानूनी फंदा भी कस रहा है. CBI ने उनके खिलाफ एक अलग मामला दर्ज किया है. उन पर LIC हाउसिंग फाइनेंस को 1,322 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है. शिकायत के मुताबिक साल 2018 में सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी पर दो बड़े लोन दिए गए थे. उस वक्त एक सर्टिफिकेट के जरिए उनकी संपत्ति 59,113 करोड़ रुपये बताई गई थी. लेकिन जब दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई, तो उन्होंने बताया कि 2024 में उनकी नेटवर्थ सिर्फ 31.79 करोड़ रुपये है. LIC का आरोप है कि लोन लेने के लिए गलत जानकारी का इस्तेमाल किया गया.
- Legend News

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