अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ के खिलाफ मुक़दमा दायर किया है. राज्यों ने 60 व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए 10 से 12.5 फ़ीसदी टैरिफ़ को चुनौती दी है.
उनका कहना है कि यह फ़ैसला 'मनमाना, तर्कहीन और क़ानून के ख़िलाफ़' है.
दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने जुलाई में इन टैरिफ़ को लागू किया था. इसके दायरे में ब्रिटेन, चीन और यूरोपीय संघ समेत कई देश शामिल हैं.
अमेरिकी सरकार का कहना है कि इन देशों ने जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से तैयार सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त क़दम नहीं उठाए हैं.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि अमेरिका अपने अधिकारों के तहत यह कार्रवाई कर रहा है. उनका कहना है कि जिन देशों की वजह से जबरन श्रम से बने सामान अमेरिका पहुँच रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ क़दम उठाना ज़रूरी है, क्योंकि इससे अमेरिकी कंपनियों को नुक़सान हो रहा है.
ट्रंप प्रशासन ने ये टैरिफ़ 1974 के अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत लगाए हैं. इस क़ानून के तहत अमेरिका उन देशों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकता है, जहाँ जबरन श्रम जैसी गतिविधियाँ सामने आती हैं.
टैरिफ़ से प्रभावित कई देशों ने भी अमेरिकी फ़ैसले पर नाराज़गी जताई है. ब्राज़ील और जापान की सरकारों ने इन क़दमों को अनुचित बताया है. वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने इसे राजनीतिक हेरफेर का बहाना क़रार दिया है. 
-Legend News

मिलती जुलती खबरें

Recent Comments

Leave A Comment

Don’t worry ! Your Phone will not be published. Required fields are marked (*).