नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी कामयाबी मिली है। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बुधवार को 20 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों के सरेंडर से नक्सली संगठनों का बड़ा झटका लगा है। जिन 20 नक्सलियों ने सरेंडर किया है उनमें से 11 पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम था। माओवादी विचारधारा से परेशान होकर नक्सलियों ने सरेंडर का फैसला किया है।
नक्सलियों के सरेंडर की जानकारी पुलिस अधिकारियों ने दी। एक अधिकारी ने बताया कि 20 नक्सलियों में से नौ महिलाएं हैं, जिनमें पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बटालियन नंबर 1 की एक सदस्य भी शामिल है। 
क्यों किया सरेंडर का फैसला
मामले की जानकारी देते हुए सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि उन्होंने खोखली माओवादी विचारधारा, निर्दोष आदिवासियों पर नक्सलियों के अत्याचारों और प्रतिबंधित संगठन में बढ़ते आंतरिक मतभेदों से निराशा का हवाला देते हुए वरिष्ठ पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले लोग राज्य सरकार की 'नियाद नेल्लनार' (आपका अच्छा गांव) योजना से भी प्रभावित थे, जिसका उद्देश्य दूरदराज के गांवों में विकास कार्यों को सुविधाजनक बनाना और नयी आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति को अमल में लाना है। 
टॉप महिला कमांडर भी शामिल
अधिकारी ने बताया कि माओवादियों की पीएलजीए बटालियन नंबर 1 की सदस्य शर्मिला उर्फ उइका भीमे और माओवादियों के पश्चिम बस्तर डिवीजन की सदस्य ताती कोसी उर्फ परमिला पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने बताया कि एक अन्य माओवादी मुचाकी हिड़मा पर पांच लाख रुपये का इनाम था। चार नक्सलियों पर 4-4 लाख रुपये और चार पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था। 
सरेंडर करने वालों को मिलेगी सहायता
सुकमा एसपी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये की सहायता दी गई है और सरकार की नीति के अनुसार उनका पुनर्वास किया जाएगा। उन्होंने प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े सभी लोगों से हिंसा छोड़ने की अपील की और उन्हें सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का आश्वासन दिया। 
-Legend News

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