सिंधी समाज ने की झूलेलाल मंदिर तोड़ने की निन्दा

मथुरा। विकास के नाम पर गोरखपुर के गोरखनाथ धाम स्थित 70 वर्ष पुराना वरूणावतार भगवान झूलेलाल का मंदिर प्रशासन द्वारा बुल्डोजर चलाकर गिराने पर सिंधी समाज आहत है।

उप्र लाड़ी लुहाणा सिंधी पंचायत के प्रदेश महासचिव रामचंद्र खत्री ने कहा कि सिंधी समाज के इष्टदेव झूलेलाल जी का मंदिर गिराना अत्यंत दुखद और हृदय विदारक है।इससे सम्पूर्ण सिंधी समाज की आस्था को गहरी चोट पहुंची है। दूसरी जगह प्राण प्रतिष्ठा किए बगैर मंदिर तोड़ना न केवल निन्दनीय है, बल्कि असहनीय भी है।

प्रदेश अध्यक्ष नारायण दास पारवानी ने कहा कि जब विकास के नाम पर मंदिर तोड़ना पूर्व निर्धारित था, तो पहले एक निश्चित स्थान देकर मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करके भगवान झूलेलाल की मूर्ति स्थानांतरित करना चाहिए था।

पंचायत के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्यामदास देवनानी ने कहा कि गोरखपुर में झूलेलाल मंदिर गिराया जाना अत्यंत पीड़ादायक है। भगवान झूलेलाल जी की मूर्ति पर्दे में ढककर गोरखपुर की सिंधी धर्मशाला में रखी गई है। इससे सिंधी समाज की आस्था को ठेस पहुंची है

प्रदेश मीडिया प्रभारी किशोर इसरानी ने कहा उत्तर प्रदेश के सिंधी समाज के मेहनत और खून-पसीने के साथ ही तन-मन-धन के योगदान से गोरखपुर में 70 वर्ष पूर्व बना भगवान झूलेलाल का मंदिर सिंधी समाज के आस्था, विश्वास और आध्यात्म का मुख्य केंद्र था, जो विकास के नाम पर बलि चढ़ गया, सिंधी समाज के अरमान चूर-चूर हो गए।

जिस मंदिर में खुद सीएम आदित्यनाथ योगी भगवान झूलेलाल की आरती-पूजन कर चुके है, उसी मंदिर को उन्हीं (सीएम योगी) के कार्यकाल में लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों में इस तरह बिना प्राण प्रतिष्ठा के तोड़े जाने से, न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश का सिंधी समाज दुखी है। गुजरात, सौराष्ट्र, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश के कई शहरों में झूलेलाल मंदिर तोड़े जाने की निन्दा की जा रही है।

नारायण दास लखवानी, जीवतराम चंदानी, तुलसीदास गंगवानी, बसंतलाल मंगलानी, गुरूमुखदास गंगवानी, चंदनलाल आडवानी, किशोर इसरानी आदि ने बिना प्राण प्रतिष्ठा किए मंदिर तोड़े जाने पर रोष प्रकट किया है।

-Legend news

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