सिंधी जनरल पंचायत ने मनायी Swami Lilashah जयंती

Swami Lilashah जयंती पर नगर में निकाली संकीर्तन यात्रा, हुआ सत्संग, शहंशाह लीलाशाह के जयकारों से गूंज उठा शहर

मथुरा। सिंधी समुदाय के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी लीलाशाह जी महाराज की जयंती श्रद्वा एवं भक्ति भाव के साथ मनायी गयी।
रविवार को सिंधी जनरल पंचायत द्वारा स्वामी लीलाशाह की फूलों से सुसज्जित झांकी संकीर्तन यात्रा के साथ नगर में निकाली गयी।

बहादुर पुरा स्थित स्वामी लीलाशाह धर्मशाला से सुबह सात बजे से शुरू हुई संकीर्तन यात्रा की ध्वनि शहर का वातावरण भक्तिमय कर रही थी। यात्रा में शामिल सिंधी समुदाय के सैकड़ों नर-नारी ”सिन्धी समाज का नारा है, लीलाशाह हमारा है‘‘ गाते चल रहे थे, साथ ही “जो बोलेगा लीलाशाह, उसका होगा बेडापार” तथा “शहंशाह लीलाशाह के जयकारे लगाते चल रहे थे,” जिससे शहर गूंज उठा। इसमें नन्हें-बच्चों और युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।

संकीर्तन यात्रा में सिंधी युवा महिला मंडल की अध्यक्ष गीता नाथानी, भारती उकरानी, अनिता चावला, जानकी चंदानी, रजनी इसरानी, कोकल भाटिया आदि सहित सैंकड़ों महिलाओं और युवतियों ने उत्साह के साथ भागीदारी की।

संकीर्तन यात्रा का नगर में स्थान-स्थान पर विभिन्न प्रतिष्ठान एवं संस्थाओं द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया तथा स्वामी जी की छवि की पूजा अर्चना कर प्रसाद का वितरण किया गया। यात्रा जवाहर हाट, होली गेट, छत्ता बाजार, डोरी बाजार , चौकी बाजार ,भरतपुर गेट, कोतवाली रोड़ से होते पुनःअपने उद्गम स्थल सिंधी धर्मशाला पहुंची, जो एक सत्संग के रूप में परिवर्तित हो गयी, जिसमें लक्ष्मी निरंकारी, सिंधी कलाकार चंद्रकांत लालवानी, लक्ष्मी निरंकारी और किशोर इसरानी आदि ने भक्ति भजन प्रस्तुत किये। संचालन तुलसीदास गंगवानी ने किया।

पंचायत अध्यक्ष नारायणदास लखवानी, मुख्य संयोजक रामचंद्र खत्री, बसंत मंगलानी, तुलसीदास गंगवानी, किशोर इसरानी, जीवतराम चंदानी, गुरूमुखदास, जितेन्द्र लालवानी, किशन भाटिया, चंदनलाल आडवानी, गोपाल भाटिया, सुदामा खत्री, दौलतराम, झामनदास नाथानी, सुनील पंजवानी, सुंदरखत्री, प्रदीप उकरानी, पीताम्बर रोहेरा, सुरेश मेठवानी, मिर्चुमल, कंहैयालाल, लीलाराम लखवानी, अनिल, अशोक अंदानी, विष्णू हेमानी, भगवानदास बेबू , हरीश चावला, सुरेश मनसुखानी, विशनदास, गोविंद चंदानी, लख्मीखत्री, योगेश खत्री, ओमी आदि ने स्वामी लीलाशाह महाराज की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए स्वामी लीलाशाह जी के प्रेरक प्रसंग सुनाये तथा उन्हे अपना आदर्श बताया।

प्रेरक है स्वामी लीलाशाह का जीवन

स्वामी लीलाशाह जी हर किसी को ईश्वर की उपासना व जनसेवा की ओर प्रेरित करने वाले मानवता के सच्चे हितेषी थे। सिंधी लेखक किशोर इसरानी ने बताया कि स्वामी जी का जन्म सिंध प्रांत (तत्कालिन भारत का हिस्सा) के हैदराबाद जिले की टंडे बाग तहसील में महाराव चंडाई नामक गांव में सन् 1880 में ब्रहम क्षत्रिय कुल में हुआ था।

अध्यक्ष नारायण दास लखवानी के अनुसार स्वामी लीलाशाह वेद विद्या और सनातन धर्म के उच्च ज्ञाता थे, वह समाज में व्यप्त कुरीतियों तथा लुप्त होते धार्मिक संस्कारों से काफी दुखी थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति के पुनरोत्थान तथा सोई हुई आध्यात्मिकता को जगाने के लिये बेहतर कार्य किये उन्होंने जहां समाज को आध्यात्मिक संदेश दिया वहीं समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने हेतु सबको जागृत किया और दहेज बिना सामुहिक विवाह समारोह के प्रेरक आयोजन शुरू कराये।

मुख्य संयोजक रामचंद्र खत्री ने बताया कि स्वामी लीलाशाह समाज के निर्बल वर्ग की पीड़ा से काफी आहत रहते थे, उन्होंने निर्धन विद्यार्थियों को पाठ्य सामिग्री एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। कई स्थानों पर धर्मशाला, गौशाला, पाठशाला व सत्संग भवन बनवाये, ऐसे महान संत ने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा में अर्पण करते हुए 4 नवम्बर सन् 1973 को अपना नश्वर शरीर त्याग दिया।

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