श्रीकेशवदेव ने नृसिंह रूप किया धारण, जन्मभूमि पर हुए प्रकट

मथुरा। नास्तिक हिरण्यकश्यप के अत्याचारों की पराकाष्ठा जब अपने पुत्र प्रह्लाद को भी प्रताड़ित करने लगी तब आज ही के दिन भगवान श्रीविष्णुहरि ने खम्भ से प्रकट होकर अपने तीक्ष्ण नखों से आतातायी हिरण्यकश्यप का वध किया था, इस प्रकार अधर्म पर धर्म की एक बार फिर विजय आज ही के दिन हुई थी ।

नरसिंह जयंती (Narasimha Jayanti 2019) के दिन भगवान विष्णु आधा नर और आधा शेर यानी नरसिंह अवतार में प्रकट हुए थे।पौराणिक कथाओं में नरसिंह जयंती (Narasimha Jayanti) की कथा काफी प्रचलित है। भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर राजा हिरण्यकश्यप का अंहकार और वरदान दोनों चूर-चूर कर दिया था। नरसिंह जयंती वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस जयंती का बहुत महत्व है।

नरसिंह जयंती का महत्व
मान्यता है कि भगवान नरसिंह के दिन उनकी पूजा और व्रत रखने से सभी दुख और दर्द दूर हो जाते हैं क्योंकि जिस प्रकार उन्होंने भक्त प्रहलाद की हमेशा रक्षा की, ठीक उसी प्रकार भगवान नरसिंह किसी पर भी कष्ट नहीं आने देते। वहीं नरसिंह जी के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में आई किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्या समाप्त हो जाती है।

नरसिंह जयंती का मंत्र
‘नैवेद्यं शर्करां चापि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्। ददामि ते रमाकांत सर्वपापक्षयं कुरु’

नृसिंह जयंती के अवसर पर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान स्थित मंदिरों में भगवान श्रीकेशवदेव के विग्रह का संधिकाल में श्रृंगार कर नृसिंह स्वरूप प्रदान कर पूजन अभिषेक उपरांत विशेष आरती की गई ।
इस अवसर पर संस्थान के सं.मुख्य अधिशासी राजीव श्रीवास्तव, विशेष कार्याधिकारी विजय बहादुर सिंह, अनुरक्षण अधिकारी नारायण राय, भगवानस्वरूप वर्मा, गद्दीप्रभारी योगेन्द्र शर्मा एवं पूजाचार्य विन्ध्येश्वरी प्रसाद अवस्थी आदि उपस्थित रहे ।

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