इराक़ के संसदीय चुनाव में शिया धार्मिक नेता ने किया जीत का दावा

शिया धार्मिक नेता मुक़्तदा अल-सद्र ने इराक़ के संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी की जीत का दावा किया है.
इराक़ के आंतरिक मामलों में अमेरिका और ईरान के हस्तक्षेप की हमेशा खिलाफ़त करने वाले सद्र ने वादा किया है कि उनकी सरकार विदेशी दख़ल से मुक्त होगी. अब तक के आए नतीज़ों के मुताबिक़ सद्र की पार्टी को 329 में से 73 सीटें मिल रही हैं. वहीं, सुन्नी प्रवक्ता मोहम्मद अल-हालबोउसी का तक़द्दम गठबंधन 38 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है.
ईरान समर्थित फ़तेह गठबंधन को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है और उसे महज़ 14 सीटों पर जीत मिल पाई है.
माना जा रहा है कि सरकार बनाने के लिए गठबंधन तैयार करने में हफ़्तों का समय लग सकता है और सद्र इसके नेता नहीं बन सकेंगे क्योंकि उन्होंने ख़ुद चुनाव नहीं लड़ा था.
चुनाव में सिर्फ़ 41% मतदान
इस बार के चुनाव में महज 41% लोगों ने मतदान किया जो ये दिखाता है कि बड़ी संख्या में इराक़ी लोग मानते हैं कि सत्ता में परिवर्तन से ज़्यादा कुछ नहीं बदलेगा.
साल 2003 में अमेरिकी हमले के बाद से ही इराक़ में सांप्रदायिक और जातीय पहचान पर आधारित सत्ता के साझेदारी की प्रणाली शुरू हुई.
इससे एक छोटे अभिजात्य वर्ग की सत्ता पर एक मजबूत पकड़ बनी और भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया गया.
साल 2019 में भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और अराजकता के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों के बाद ये पहले आम चुनाव हैं.
ये चुनाव अगले साल होने थे लेकिन देश में बढ़ते प्रदर्शनों को देखते हुए इसे तय वक़्त से छह महीने पहले ही कराया गया था. इन प्रदर्शनों में सैकड़ों लोग मारे गए थे.

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