वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी द्वारा सम्मानित हुए शशांक

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सीनियर रिसर्च फेलो शशांक कुलकर्णी को ‘ग्लोबल एजुकेशन कॉन्क्लेव- 2021’ में ‘ग्लोबल यंग एस्पिरेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।

सम्मेलन संयुक्त रूप से वेस्टर्न सिडनी विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया के स्मार्ट मॉडर्न कंस्ट्रक्शन सेंटर, जी डी अग्रवाल सेंटर फॉर साइंटिफिक डेवलपमेंट एंड एन्वाइरन्मेंट एडवोकेसी , ग्रीन थिंकर जेड इंडिया और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गनाइज्ड रिसर्च  द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।

इस वर्ष विश्व सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल मीडिया द्वारा कोरोना के कारण उत्पन्न स्थिति को देखते हुए किया गया था। वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह महत्वपूर्ण सम्मेलन सतत विकास के लिए काम करने वाले शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए एक शक्तिशाली वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है।

सम्मेलन युवा शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और लेखकों को सम्मानित करता है जिन्होंने दुनिया के शाश्वत विकास में योगदान दिया है। कॉन्क्लेव को प्रबंध सदस्य गुनीत कौर ने संचालित किया और ग्रीन थिंकर जेड के अध्यक्ष तनवीर सिंह ने स्वागत और परिचयात्मक टिप्पणी की।

ग्रीस के रेना लंपाऊ, सऊदी अरब के एफिया बानो, फिलीपींस के डॉ. जॉन विंसेंट,  श्रीलंका की डॉ. प्रसन्ना कुमारी, यूनान की रानिया लम्पाऊ जैसे दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित गणमान्य लोग प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। भारत के राष्ट्रपति के द्वारा  राष्ट्रीय आईसीटी  पुरस्कार से सम्मानित तथा प्रतिष्ठित फुलब्राइट  पुरस्कार प्राप्त करने वाले ख्यातनाम शिक्षाविद अमित कुमार ने समापन भाषण दिया।

शशांक कुलकर्णी को यह पुरस्कार भारत में कृषि और कृषि नीतियों पर अनुसंधान में उनके योगदान के लिए दिया गया है। शशांक एक कृषि अभियंता हैं। उन्होंने महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय, राहुरी से कृषि इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की है।

मूल रूप से महाराष्ट्र मे सांगली जिले के साखराळे के रहने वाले, वह वर्तमान में जम्मू और कश्मीर के केंद्रीय विश्वविद्यालय में लोक नीति और लोक प्रशासन विभाग में पिछले साढ़े चार वर्षों से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सिनियर रिसर्च फेलो के रूप मे भारत की कृषि और किसान नीतियों पर शोध कर रहे हैं।

इनमें भारतीय कृषि और किसानों से संबंधित मुद्दे जैसे राष्ट्रीय किसान नीति, स्वामीनाथन आयोग, विदर्भ में किसानों की आत्महत्या और स्थायी नीतिगत उपाय शामिल है।

उन्होंने अब तक विभिन्न विषयों पर मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में कुल दस पुस्तकें लिखी हैं। उनमें से छह प्रकाशित हो चुके हैं और बाकी प्रक्रिया में हैं। उनके द्वारा शोध के आधार पर  ‘स्वामीनाथन आयोग: ए फाउंडेशन ऑफ फार्मर पॉलिसीज इन इंडिया’ यह बहुचर्चित किताब लिखी गई है, जिसे भारतीय हरित क्रांति के जनक प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन की प्रस्तावना मिल चुकी है।

उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित विश्व पत्रिकाओं में अपने शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं और कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया है। शशांक कुलकर्णी को इस पुरस्कार के लिए विभिन्न क्षेत्रों से बधाई दी जा रही है।

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