वरिष्ठ अभिनेता विक्रम गोखले ने कहा, मैं कंगना के आजादी वाले बयान से सहमत

वरिष्ठ अभिनेता विक्रम गोखले ने कहा कि वह अभिनेत्री कंगना रनौत के ‘1947 में भीख में मिली आज़ादी’ वाले बयान से सहमत हैं. साथ ही उन्होंने कंगना के उस बयान का भी समर्थन किया है जिसमें अभिनेत्री ने कहा था ‘देश को असली आज़ादी 2014 में मिली.’
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर छपी ख़बर के मुताबिक़ गोखले को उनके 75वें जन्मदिन पर सम्मानित करने के लिए पुणे शहर में ब्राह्मण महासंघ ने एक कार्यक्रम आयोजित किया,
जहां उन्होंने कहा कि “कंगना ने जो कहा है, उससे मैं सहमत हूं. हमें भीख में स्वतंत्रता मिली. जो लड़ाके इसे अंग्रेज़ों से छीनना चाहते थे, उन्हें फांसी पर लटका दिया गया और उस समय के दिग्गजों ने उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की.”
बाद में गोखले ने बताया, ”मैं कंगना की उस बात से भी सहमत हूं कि भारत को असली आज़ादी 2014 में मिली.”
गोखले ने ये भी कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंध-समर्थक नहीं हैं. उन्होंने अख़बार को बताया कि “जब पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार करते हैं तो मैं उनकी बातों से सहमत नहीं होता. लेकिन हां… जब वे राष्ट्रहित में काम करते हैं तो मैं उनका समर्थन करता हूं.”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “अगर गोखले कंगना का समर्थन कर रहे हैं तो उन्हें भाजपा में शामिल होना जाना चाहिए.”
उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गोखले ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के समर्थक नहीं हैं. गोखले कहते हैं, “मेरे विचार… मेरे विचार हैं. इसे कोई राजनीतिक दल निर्देशित नहीं करता है. सभी पार्टियां समान हैं.”
‘मी नाथूराम गोडसे बोलते’ फिल्म में गोडसे की भूमिका निभा कर सुर्खियां बटोरने वाले अभिनेता शरद पोंकशे ने कहा कि ”स्वतंत्रता सेनानियों, देशभक्तों, सत्याग्रहियों, अहिंसा में विश्वास रखने वालों और यहां तक कि घर पर रहकर प्रार्थना करने वालों की लड़ी गई लड़ाई की वजह से भारत को आज़ादी मिली. भारतीय ने ये स्वतंत्रता 1947 में पाई है, न कि 2014 में.”
संभाजी ब्रिगेड संस्था से जुड़े संतोष शिंदे ने कहा, “रनौत का समर्थन करने वाले गोखले को देशद्रोह लगाया जाना चाहिए, हम सोमवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करेंगे.”
थिएटर और फ़िल्मों की दुनिया में जाने-माने नाम विक्रम गोखले ने यह भी कहा कि शिवसेना और बीजेपी को हाथ मिला लेना चाहिए.
वह कहते हैं, ”दोनों दलों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहा हूं, मेरे प्रयास जारी हैं. मैंने व्यक्तिगत रूप से देवेंद्र फडणवीस (पूर्व सीएम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता) से पूछा था कि उन्होंने ढाई साल तक सीएम का पद शिवसेना को क्यों नहीं दिया. उन्होंने मुझसे कहा कि यह एक ग़लती थी.”
-एजेंसियां

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