आत्मनिर्भर भारत पैकेज: खेती-किसानी के लिए हुई घोषणाओं पर कैबिनेट की मुहर

नई दिल्‍ली। केंद्रीय कैबिनेट ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत खेती-किसानी के लिए हुई घोषणाओं पर आज मुहर लगा दी। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से कई कृषि उत्पादों को बाहर करने की घोषणा को कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है।
उन्होंने बताया, ‘कैबिनेट मीटिंग में किसानों के लिए तीन बड़े निर्णय हुए। साथ ही, देश में निवेश आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय हुए और दो निर्णय अलग से भी हुए हैं।’
जावड़ेकर ने कहा, ‘आवश्यक वस्तु कानून की तलवार ने निवेश को रोक रखा था, आज इस अनाज, तेल, तिलहन, दाल, प्याज, आलू- ऐसी वस्तुएं आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से बाहर कर दी गईं। अब किसान इनका योजना के अनुसार भंडारण कर सकता है, बिक्री कर सकता है। इससे किसानों को बहुत फायदा होगा।’ उन्होंने कहा कि किसानों की ये मांग 50 सालों से थी। आज यह मांग पूरी हो गई है।

क्या था आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955
आवश्यक वस्तुओं या उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा उन्हें जमाखोरी एवं कालाबाज़ारी से रोकने के लिये वर्ष 1955 में आवश्यक वस्तु अधिनियम बनाया गया था। आवश्यक वस्तुओं में दवाएँ, उर्वरक, दलहन और खाद्य तेल, पेट्रोलियम इत्यादि शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट के सभी फैसलों की बारी-बारी से जानकारी दी, उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने कल येे छह बड़े निर्णय लिए हैं।

पहला, किसान कहीं भी उत्पादन बेच सकेगा और उसे ज्यादा दाम देने वालों को उत्पाद बेचने की आजादी मिली है।
दूसरा, वन नेशन, वन मार्केट की दिशा में भारत आगे बढ़ेगा। इसके लिए कानून बनेगा।
तीसरा, ज्यादा कीमतों के गारंटी पर एक निर्णय हुआ। अगर कोई निर्यातक है, कोई प्रोसेसर है, कोई दूसरे पदार्थों का उत्पादक है तो उसको कृषि उपज आपसी समझौते के तहत बेचने की सुविधा दी गई है। इससे सप्लाई चेन खड़ी होगी। भारत में पहली बार ऐसा कदम उठाया गया है।
चौथा निर्णय हुआ है वाणिज्य और उद्योग जगत के लिए। हर मंत्रालय में प्रोजेक्ट डेवेलपमेंट सेल बनेगी। इससे भारत निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक और अनुकूल देश बनेगा।
पाचवां, कोलकाता पोर्ट को श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जनवरी को इसकी घोषणा की थी
छठा, फार्मोकोपिया कमीशन की स्थापना का निर्णय हुआ है। फार्मोकोपिया कमिशन होम्योपैथी ऐंड इंडियन मेडिसिन होगी।
गाजियाबाद में आयुष मंत्रालय के दो लैब्स हैं। इन दोनों लैब्स का भी इसके साथ मर्जर हो रहा है।

अब क्या होगा लाभ
1. अब किसान सीधे अपनी फसलें बेच सकेंगे, अब देश में किसानों के लिए एक देश एक बाजार होगा।
2. कृषि उत्पादों के स्टॉक सीमा से खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के काम-काज पर असर पड़ता है। उन्हें अपना कार्य सुचारू रूप से ज़ारी रखने के लिये अधिक स्टॉक रखने की आवश्यकता होती है।
3. इस सीमा के हटने से खाद्य प्रसंस्करण एवं शीत भंडारण गृहों में बड़ी संख्या में निजी निवेश हो सकेगा तथा किसानों को उनकी उपज की बेहतर कीमत प्राप्त हो सकेगी।
4. कृषि उत्पादों के भंडारण से पाबंदियाँ हटाने से संगठित व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, कृषि कारोबार में व्यापकता आएगी और माल के ढुलाई में आसानी होगी।
5. इससे इस क्षेत्र में निवेश भी बढ़ेगा।
6. नियमों और स्टॉक सीमा में बार-बार बदलाव से व्यापारियों को भंडारण संरचना में निवेश करने में कोई फायदा नज़र नहीं आता है।

-एजेंसियां

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