UNHRC में बोले सेदिकुल्लाह राही, सरकार गिराने को तालिबान का समर्थन कर रहा पाक

जिनेवा /स्विट्जरलैंड। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. नजीबुल्लाह के भाई सेदिकुल्लाह राही ने कहा है कि पाकिस्तान काबुल में निर्वाचित सरकार को गिराने के लिए तालिबान का समर्थन कर रहा है।
जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के 43वें सत्र के मौके पर एएनआई से बात करते हुए सेदिकुल्लाह ने कहा कि अमेरिका और तालिबान के बीच हालिया अफगान शांति समझौता अफगानिस्तान के लोगों की इच्छा के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि जब से तालिबान अफगानिस्तान में आया है, तबसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई उसका समर्थन कर रही है। अफगानिस्तान में तालिबान, पाकिस्तानी सैन्य इच्छा का प्रतिनिधित्व कर रहा है। सेदीकुल्लाह ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जिस संगठन ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, मैं उन पर विश्वास नहीं करता हूं। न तो मैं उनके साथ सहमत हूं और न ही अफगानिस्तान में कोई करता है। अफगानिस्तान के लोग इस सौदे से बहुत परेशान हैं।

तालिबान एक धार्मिक कट्टरपंथी समूह

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान एक धार्मिक कट्टरपंथी समूह है। अफगानिस्तान के लोग उन्हें नहीं चाहते हैं और वे उनकी बातों से सहमत नहीं हैं। अफगान‍िस्तान के लोग एक पवित्र देश चाहते हैं। अफगान समाज एक इस्लामी समाज है, लेकिन दुर्भाग्य से पाकिस्तान तालिबान के तहत उन पर शासन करना चाहता है। उन्होंने कहा कि तालिबान एक ऐसा समूह है जो अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हितों का प्रतिनिधित्व करता है।

अमेरिकी सैनिकों की होगी वापसी

अफगानिस्तान में लगभग दो दशक पुराने संघर्ष को समाप्त करने के लिए 29 फरवरी को संयुक्त राज्य अमेरिका और तालिबान के बीच दोहा में शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए। समझौते के तहत अमेरिका अगले 14 महीने के अंदर अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिकों की वापसी करेगा। वर्तमान में अफगानिस्तान में 13 हजार अमेरिकी सैनिक हैं। पहले चरण में लगभग 5 हजार सैनिक वापस होंगे।

अफगानिस्तान के लोगों को अस्वीकार्य

सेदिकुल्लाह ने कहा कि अफगान‍िस्तान सरकार की भागीदारी के बिना अफगान शांति समझौते पर सहमति हुई और अफगानिस्तान के लोगों को ये अस्वीकार्य है। अफगानिस्तान में सभी देशभक्त इस समझौतो को अस्वीकार कर रहे हैं। यह अमेरिका के साथ अफगान लोगों का सौदा नहीं है। उन्होंने इस सौदे पर हस्ताक्षर किए और उन्होंने इसके बारे में बंद दरवाजे के पीछे बात की। अफगानिस्तान के लोगों को मुद्दों के बारे में सूचित नहीं किया गया कि अमेरिका ने तालिबान के साथ क्या बातचीत की है।

– एजेंसी

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