कृषि कानूनों पर सिंधिया ने कांग्रेस से पूछा, देश के साथ खिलवाड़ कब तक

नई दिल्‍ली। सत्तारूढ़ भाजपा ने विवादों में घिरे तीन नये कृषि कानूनों का बचाव करते हुए बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही भाजपा ने कृषि बाजार सुधारों को लेकर विपक्षी दलों द्वारा उनके रुख को बदले जाने को लेकर भी सवाल उठाये।
राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है तथा पिछले छह सालों में उनकी आय बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठाये गये हैं। सिंधिया ने इस बात को भी रेखांकित किया कि सरकार कोविड-19 महामारी से निबटने में सफल रही और उसने आपदा को एक अवसर में परिवर्तित कर दिया।
सिंधिया ने नए कृषि कानूनों का बचाव करते हुए कहा कि किसान देश के लिए रीढ़ की हड्डी और अन्नदाता हैं तथा वे अपना ही नहीं पूरे विश्व का पेट भरते हैं। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून इसलिए लाए गए ताकि उनकी प्रगति हो सके। उन्होंने कहा कि देश को राजनीतिक आजादी करीब 70 साल पहले मिल गयी थी लेकिन किसानों को उनकी वास्तविक आजादी नहीं मिल पायी।
भाजपा नेता ने कहा कि नए कृषि कानूनों से किसानों को आजादी मिल सकेगी और वे देश भर में कहीं भी अपनी उपज बेच सकेंगे जिससे उनकी आय भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ 11 बार वार्ता हुई और सरकार ने 18 महीने कानून स्थगित करने की भी बात की है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने इस क्रम में कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि पार्टी ने 2019 में अपने चुनावी घोषणा पत्र में कृषि सुधारों का वायदा किया था। इसके अलावा राकांपा नेता और तत्कालीन संप्रग सरकार में कृषि मंत्री शरद पवार ने 2010-11 में हर राज्यों के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को अनिवार्य बनाने संबंधी बात की थी।
सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘जुबान बदलने की आदत बदलनी होगी। चित्त भी मेरा, पट भी मेरा..देश के साथ खिलवाड़ कब तक चलेगा। जो कहें, उस पर अडिग रहें।’ उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण पिछला साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा समय से उठाए गए कदमों से स्थिति में काफी सुधार हुआ।
उन्होंने कहा कि महामारी से मुकाबला करने के लिए प्रधानमंत्री ने सभी प्रयासों को एक ही मुट्ठी में बांधा और युद्धस्तर पर नीति तैयार की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ न सिर्फ भारत में बल्कि साझा विश्व अभियान का भी नेतृत्व किया।
उन्होंने कहा कि समय से उठाए गए कदमों के कारण भारत मामारी के दूसरे चरण से बच गया और लाखों जानें बच सकीं। महामारी पर काबू पाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की चर्चा करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि 60 दिनों के अंदर भारत ने महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की और पीपीई किट का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया तथा साल भर के अंदर देशी टीका तैयार कर लिया गया।
भाजपा सदस्य ने कहा कि लॉकडाउन को लेकर विपक्षी नेता सिर्फ सवाल उठा रहे हैं और टीका-टिप्प्णी कर रहे हैं जबकि सदन में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा नीत एक संसदीय समिति ने कोविड-19 के प्रबंधन को लेकर सरकार की सराहना की तथा कहा है कि लॉकडाउन से सरकार को तैयारियां करने का मौका मिला।
सिंधिया ने सरकार के कदमों की सराहना करते हुए कहा कि मात्र छह माह की अवधि में अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर ला दिया गया और जनवरी में हुआ जीएसटी संग्रह इसका उदाहरण है।
-एजेंसियां

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