संस्कृति विवि ने किया टीसीएस आयॉन के साथ महत्वपूर्ण करार

मथुरा। विद्यार्थियों को अंतर्ऱाष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और कौशल देने की दिशा में संस्कृति विश्वविद्यालय ने एक और बड़ा कदम उठाया है। संस्कृति विवि ने टीसीएस आयॉन से करार कर इंडस्ट्री आनर प्रोग्राम की शुरुआत करते हुए इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डाटा साइंस, आर्टिफिशयल इंटेलीजेंसी, मैकेनिकल और वाणिज्य के क्षेत्र में बी.काम., बीबीए, एमबीए, फाइनेंशियल मार्केट, बैंकिंग, इंश्योरेंस, बिजनेस एनालिटिक कोर्सेज की उत्कृष्ट शिक्षा की व्यवस्था की है। इतना ही नहीं इस प्रोग्राम के तहत इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थी टीसीएस के डिजिटल एक्सामिनेशन में भाग ले सकेंगे और उच्च वेतनमान वाली नौकरियां हासिल कर सकेंगे।

संस्कृति विवि के कुलपति डा. राणा सिंह ने बताया कि यह करार उच्च शिक्षा में ब्रज क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि तो है ही साथ ही संस्कृति विवि के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा मौका भी है। करार के तहत टीसीएस आयॉन के साथ मिलकर संस्कृति विवि इंडस्ट्री आनर प्रोग्राम के तहत डाटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी, इमर्सिव एक्सपीरियेंस में बी.टेक(कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनिरिंग), मैकेनिकल इंजीनियरिंग का डिग्री कोर्स कराया जायेगा। इसी प्रकार वाणिज्यिक शिक्षा के अंतर्गत फाइनेंशियल मार्केट, बैंकिंग एंड इंश्योरेंस, बीएफएसआई, बिजनेस एनालिटिक्स में बी.काम. आनर्स, बीबीए, एमबीए का डिग्री कोर्स कराया जाएगा। महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इन सभी पाठ्यक्रमों को देश के जाने माने शिक्षक, विशेषज्ञ डिजिटल प्लेटफार्म पर पढ़ाएंगे। विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कौशल और ज्ञान उपलब्ध हो सकेगा। इंजीनियरिंग के विद्यार्थी टीसीएस के उन डिजिटल एक्सामिनेशन में बैठने के लिए अधिकृत होंगे जिनको क्लीयर करने के बाद उच्च वेतनमान वाले अवसर हासिल करने में कामयाब हो सकेंगे।

डा. राणा ने बताया कि आधुनिकतम शिक्षा हासिल करने वाले इन विद्यार्थियों को विश्व की टॉप कार्पोरेट कंपनियों में रोजगार के मौके मिल सकेंगे। करार के तहत संस्कृति विवि के इन विद्यार्थियों को टीसीएस आयोन में इंटर्नशिप का सुनिश्चित मौका मिलेगा। वाणिज्य के क्षेत्र में विद्यार्थियों को ट्रेडिंग, रिटेल इन्वेस्टिंग की थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल जानकारी भी हासिल हो सकेगी। यानी की वित्तीय जगत की व्यवहारिक शिक्षा में विद्यार्थी पारंगत हो सकेंगे। डा. राणा ने बताया कि यह करार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

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