वाराणसी: 183 दिन बाद खुले संकट मोचन मंदिर के पट, भक्तों की लाइन लगी

वाराणसी। कोरोना लॉकडाउन के 183 दिन बाद वाराणसी में संकट मोचन मंदिर के पट भक्तों के लिए दोबारा खुल गए हैं। सुबह-सुबह मंदिर के बाहर भक्तों की लाइन लगनी शुरू हो गई।
मंदिर में दर्शन के दौरान भक्तों ने जय श्रीराम और जय हनुमान के जयकारे लगाए। फिलहाल मंदिर को 9 घंटे के लिए ही खोला जाएगा और एक बार में सिर्फ 10 भक्तों को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिलेगी। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मंदिर में दर्शन हो सकेंगे। काशी विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर के खुलने के बाद भक्तों को संकट मोचन बाबा का दरबार खुलने का इंतजार था। भक्तों की मुराद आज पूरी हुई है।
श्रद्धालुओं की लगी लाइन
मंदिर के पट खोलने से पहले विशेष श्रृंगार और आरती की गई। 183 दिन बाद मंदिर खुलने से भक्त उत्साह में नजर आए। मंदिर परिसर में असंख्य भक्तों के आगमन के दौरान जय श्रीराम, जय हनुमान का जय कारा गूंजने लगा। सुरक्षा व्यवस्था भी मुस्तैद थी। भक्तों ने लाइन में लगकर दर्शन किए।
9 घंटे के लिए खोला जाएगा
मंदिर के महंत विशंभरनाथ मिश्र ने बताया कि शुरुआती दौर में मंदिर अल्प समय के लिए खोला गया है। 20 सितंबर से श्रद्धालु सुबह 6 बजे से 10 बजकर 30 मिनट और शाम को 3 से साढ़े 7 बजे तक रामभक्त हनुमान के दर्शन कर सकेंगे।
मंदिर के अंदर फूल-माला और प्रसाद ले जाने पर मनाही
मंदिर के अंदर मास्क लगाना अनिवार्य है। साथ ही मंदिर में प्रसाद और फूल माला ले जाने पर भी मनाही है। मंदिर के बाहर एक प्रसाद वाली दुकान में प्रसाद को बंद डिब्बे में करके रखा गया है।
दर्शन से पहले सैनिटाइजर टनल से गुजरना होगा
मंदिर में प्रवेश से पहले भक्तों को मंदिर के द्वार पर लगे सैनिटाइजर टनल से गुजरना होगा। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भक्त मंदिर में दर्शन कर पाएंगे।
लंबे इंतजार के बाद खुला मंदिर
काशी विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर के खुलने के बाद भक्तों को संकट मोचन बाबा का दरबार खुलने का इंतजार था। मंदिर में वैश्वविक महामारी कोरोना से बचने की तैयारियों के बाद अब इसे भक्तों के लिए खोलने का निर्णय लिया गया है।
प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे मंदिर
एक दिन पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था और कोरोना गाइडलाइन का जायजा लिया। मंदिर में साफ-सफाई और सैनिटाइजर की व्यवस्था देखी गई।
मंदिर परिसर के अंदर मुख्य प्रवेश द्वार से सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन कराने के लिए मंदिर परिवार के सदस्यों की तैनाती दो पालियों में की गई है।
-एजेंसियां

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