संजय राउत ने कहा, वीर सावरकर हमारी पार्टी के लिए हमेशा से आदर्श रहे हैं

पुणे। स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को लेकर छिड़ी बहस में शिवसेना और भाजपा के सुर एक हो गए हैं। शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने बुधवार को कहा कि वीर सावरकर ने कभी भी अंग्रेजों से माफी नहीं मांगी थी। मंगलवार को ही राजनाथ सिंह ने दावा किया था कि महात्मा गांधी के कहने पर वीर सावरकर ने अंग्रेजों को दया याचिका लिखी थी। राजनाथ सिंह के इस बयान को लेकर विवाद छिड़ गया है और कांग्रेस समेत कई दलों ने उनके बयान पर सवाल उठाया है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने राजनाथ सिंह के दावे को गलत बताते हुए पूछा है कि आखिर गांधी और सावरकर के बीच बात कैसे हुई थी। इसके अलावा एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि ये लोग सावरकर को राष्ट्रपिता घोषित कर सकते हैं।
इसी मामले पर मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने कहा कि एक ऐसा स्वतंत्रता सेनानी जो एक दशक से ज्यादा समय तक जेल में रहा हो, वह अपने मकसद को पूर्ण करने के लिए रणनीति अपना सकता है ताकि जेल से बाहर आए। संजय राउत ने कहा कि राजनीति और कैद के दौरान अलग ही रणनीति अपनाई जाती है। उन्होंने कहा, ‘यदि सावरकर ने ऐसी कोई रणनीति अपनाई तो फिर उसे माफी मांगना नहीं कहा जा सकता। सावरकर ने शायद ऐसी ही रणनीति अपनाई थी। उसे माफी नहीं कह सकते। सावरकर ने कभी भी ब्रिटिशर्स से माफी नहीं मांगी।’
यही नहीं, वीर सावरकर को कई बार भारत रत्न दिए जाने की मांग करने वाली शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा कि हमारी पार्टी के लिए हमेशा से आदर्श रहे हैं। राउत ने कहा कि वह स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व के आइकॉन के तौर पर हमारे आदर्श हैं। हालांकि राजनाथ सिंह के बयान को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा था कि वीर सावरकर को बदनाम करने का काम मार्क्सवादी विचारधारा के इतिहासकारों ने किया है। उन्होंने उनके बारे में मिथ्या प्रचार किया है।
-एजेंसियां

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