सबसे बुरे दौर से गुजर रही है समाजवादी पार्टी, कई और नेता पाला बदलने को तैयार

लखनऊ। अपनी स्थापना के बाद से समाजवादी पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। परिवार तक की सीटें हारने के बाद अब पार्टी के भरोसेमंद नेता धीरे-धीरे पाला बदल रहे हैं। बहुत से नेता पार्टी बदलने को लेकर तैयारी में हैं।
विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार और फिर बीएसपी के झटके के बाद से समाजवादी पार्टी अब भी हिचकोले ही खा रही है। पार्टी से नेताओं के जाने का दौर शुरू हो गया है। नीरज शेखर, सुरेंद्र नागर के बाद पार्टी के कुछ भरोसेमंद चेहरों के भी पाला बदलने की चर्चा तेज है। मुद्दों पर असमंजस और संवाद का अभाव साफ नजर आ रहा है।
पार्टी के मनोबल को वापस लाने की कोई कवायद अब तक होती नहीं दिखी है। एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विदेश से लौटने के बाद इक्का-दुक्का बैठकें प्रदेश कार्यालय पर जरूर कीं लेकिन आम कार्यकर्ताओं से व्यापक संवाद का कोई खाका जमीन पर अब तक उतरता नहीं दिखा है।
एक दशक से भी अधिक समय तक एसपी में गुजारने के बाद नीरज शेखर का पार्टी छोड़ने को भी इस भरोसे के संकट से जोड़ा जा रहा है। बीएसपी से आए सुरेंद्र नागर के बाद एसपी नेतृत्व के भरोसेमंद माने जाने वाले बड़े कारोबारी के भी पार्टी छोड़ने के कयास हैं।
आजम को बचाने में ही लगी पार्टी की पूरी ताकत
एसपी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चुनाव के पहले और चुनाव के बाद पार्टी की पूरी ताकत तो आजम खां को ही बचाने में लग रही है। चुनाव में जयाप्रदा पर उनके दिए बयानों ने किरकरी करवाई। चुनाव के बाद अब जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर आजम खां के खिलाफ मुकदमे पर पार्टी का धरना-प्रदर्शन जारी है। इस दौरान सोनभद्र से लेकर उन्नाव कांड तक के तमाम जनता से जुड़े मसलों पर एसपी से पहले कांग्रेस बाजी मार ले गई।
बीएसपी के गठबंधन से मना करने के बाद अब तक शीर्ष नेतृत्व ने न कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है और न ही पार्टी के अंदर कार्यकर्ताओं का असमंजस दूर करने की कोशिश की गई। एक-दो जिलों में सार्वजनिक कार्यक्रम में एसपी मुखिया निकले और वह सिलसिला फिर थम गया। ऐसे में तमाम नेताओं ने दूसरे ठौर तलाशने शुरू कर दिए हैं।
‘नाउम्मीदी’ के चलते भी तलाश रहे रास्ता!
नीरज शेखर और सुरेंद्र नागर के इस्तीफा देने के बाद एसपी के राज्यसभा में 11 सदस्य बचे हैं। अमर सिंह को लेकर यह संख्या 12 हो जाती है लेकिन वह एसपी में होकर भी एसपी के नहीं है। इसमें जावेद अली, रामगोपाल यादव, तंजीम फातिमा, रविप्रकाश वर्मा व चंद्रपाल यादव का कार्यकाल अगले साल नवंबर में खत्म हो रहा है। नीरज का कार्यकाल भी अगले साल खत्म हो रहा था। वहीं, सुरेंद्र नागर का कार्यकाल जुलाई 2022 में खत्म होना था। इसके अलावा अमर सिंह, बेनी प्रसाद, संजय सेठ, विशंभर निषाद का कार्यकाल भी 2022 में खत्म हो रहा है।
सूत्रों का कहना है कि नीरज लोकसभा का टिकट कटने के बाद लगभग आश्वस्त हो चुके थे कि आगे उच्च सदन जाने की संभावना उनके लिए न के बराबर है। ऐसे में रामगोपाल या आजम की पत्नी तंजीम फातिमा के आगे नीरज को तरजीह मुश्किल है। चुनाव हारने के बाद डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव के भी समायोजन का दवाब है। पार्टी के एक नेता का कहना है कि संगठन की स्थिति और नेतृत्व की दिशा को देखकर 2022 में भी एसपी के प्रदर्शन पर लोग आश्वस्त नहीं है इसलिए समय रहते नया ठिकाना तलाशने में जुट गए हैं।
-एजेंसियां

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