अखिलेश को संतों का जवाब, बाबरी के समर्थक ‘रामलला’ को क्‍या जानें

अयोध्‍या। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव द्वारा संसद में राम मंदिर निर्माण के निधि समर्पण अभियान को चंदाजीवी कहने पर बवाल मच गया है. इस पर अयोध्या के संतों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि रामलला को बाबरी मस्जिद के समर्थक क्‍या जानें?
समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव द्वारा संसद में राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए जा रही निधि समर्पण अभियान पर किए गए कटाक्ष पर अयोध्या के संतों ने नाराजगी व्यक्त की है. संतों ने यूपी के पूर्व सीएम से कहा कि राजनैतिक दायरा अलग होता है और धार्मिक मान्यताओं पर ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए. संतों ने माना कि अखिलेश यादव का बयान न सिर्फ भगवान राम का अपमान है बल्कि यह राम मंदिर और चंदा देने वाले राम भक्तों का भी अपमान है.
बता दें कि अखिलेश यादव ने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आंदोलनकारियों को आंदोलनजीवी वाले बयान पर पलटवार करते हुए राम मंदिर के निर्माण के लिए एकत्रित किए जा रहे निधि समर्पण अभियान पर कटाक्ष करते हुए कहा गया था कि भाजपा चंदा जीवी से ऊपर कुछ नहीं करती. इस पर हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि अखिलेश यादव का बयान निंदनीय है. उन्होंने राम भक्तों को चंदाजीवी कहा है. राम मंदिर से आम लोगों का भावनात्मक लगाव है. राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए जा रहे धन के विरोध में वह व्यक्ति बोल रहा है जिसने राम भक्तों पर गोली चलाई जो हमेशा से बाबरी मस्जिद का समर्थक रहा है. यह हिंदू जन भावना को आहत करने वाला बयान है. राम मंदिर से हर व्यक्ति की आस्था जुड़ी है और अखिलेश का बयान आस्था पर कुठाराघात है. महंत राजू दास ने कहा कि यह हमारा भाव है और हम अपने भाव से रामलला को समर्पित कर रहे हैं. उसको वह चंदाजीवी कह रहे हैं कि जो दुर्भाग्यपूर्ण है.
आचार्य सत्येंद्र दास ने कही यह बात
राम जन्म भूमि के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि राजनीति का उत्तर राजनीति से दिया जाए. धर्म नीति से नहीं. आंदोलन जीवी राजनीति से प्रेरित है लेकिन चंदाजीवी वह भगवान राम के मंदिर से संबंधित है. रामलला के मंदिर निर्माण से हर वर्ग का जुड़ाव हो सके और उसको यह गौरव हो कि उसने राम मंदिर निर्माण में सहयोग किया है, इस लिहाज से यह अभियान चलाया जा रहा है. राजनीति का उत्तर राजनीति से दें. रामलला के मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित की जा रही धनराशि को चंदाजीवी कह कर बदनाम न किया जाए. राम हमारी आस्था के केंद्र हैं और उस को राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है. अखिलेश यादव का बयान भगवान राम के साथ राम मंदिर में सहयोग करने वाले लोगों का अपमान है. इस तरीके की भाषा बोलना एक राजनेता के लिए उचित नहीं है.
वहीं, तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने कहा कि अखिलेश यादव का बयान निंदनीय है. उन्हें अपने ज्ञान को बढ़ाने की आवश्यकता है. आंदोलनजीवी जो नरेंद्र मोदी ने कहा है उसका अर्थ यह होता है कि आंदोलन के नाम पर फंड इकट्ठा करना, प्रशासन के ऊपर हमला करना और देश विरोधी गतिविधियां करना. मंदिर निर्माण के लिए संघ कार्यकर्ताओं के द्वारा हर व्यक्ति राम मंदिर में सहयोग करे ऐसा प्रयास है. अखिलेश यादव ने उस पर जो कटाक्ष किया है वह निंदनीय है. उनके पिता ने राम भक्तों पर गोली चलवाई थी, इस उन्‍हें राम मंदिर का निर्माण अच्‍छा नहीं लग रहा है. वह राम मंदिर के चंदे पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि राजनीति का स्वरूप देश हित में होना चाहिए देश विरोधी नहीं.
-एजेंसियां

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