भारत के वर्तमान और भविष्य को बचाने के लिए आगे आए RSS की युवा शक्‍ति: कैलाश सत्‍यार्थी

नई दिल्‍ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS ने मुख्यालय नागपुर में 93वां स्थापना दिवस व विजया दशमी समारोह मनाया। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए कैलाश सत्यार्थी ने कहा यह पर्व सिर्फ रावण पर राम की विजय का नहीं, बल्कि अहंकार पर विनम्रता की, अनीति पर नीति की और क्रूरता पर करुणा की जीत का उत्सव है। उन्होंने कहा कि यह पहाड़ों और गांवों में रहने वाले दबे कुचले लोगों की जीत का दिन है।
सत्यार्थी ने अपने भाषण में कहा कि पिछले सालों में ही दुनिया में बाल मजदूरों की संख्या 26 करोड़ से घटकर 15 करोड़ रह गई है लेकिन मुझे अफसोस है कि आज भी भारत में हमारी बेटियों को जानवरों से भी कम कीमत पर खरीदा बेचा जा रहा है। मैंने ऐसी कई बेटियों को गुलामी से मुक्त कराया है, जो छूटने के बाद भी अपने माता पिता के गले से लिपटकर रोने का साहस नहीं जुटा पाती हैं। उन्हें लगता है कि बलात्कार और यौन शोषण से उनका शरीर और आत्मा मैले हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि हम गौतम, कपिल, कणाद, अनुसुईया, सवित्री, सीता, लक्ष्मीबाई, बुद्ध, महावीर, गुरुनानक आदि की संतानें हैं। नोबल पुरस्कार विजेता ने आगे कहा कि दुनिया में लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि आपका देश तो समस्याओं की खदान है। इस पर मेरा एक ही जवाब होता है। भले ही भारत में सौ समस्याएं हैं लेकिन भारत माता एक अरब समाधानों की संख्या की जननी है।
कैलाश सत्यार्थी ने अपने भाषण में कहा कि संवेदनशीलता अथवा करुणा के बगैर किसी भी सभ्य समाज का निर्माण नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि करुणारहित राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज बिना आत्मा के शरीर की तरह होते हैं।
उन्होंने कहा कि मैं आरएसएस के युवा मित्रों से प्रार्थना करता हूं कि वे भारत के वर्तमान और भविष्य को बचाने में अगुवाई करें। गांव गांव में फैली संघ की शाखाएं, बच्चों के लिए सुरक्षाचक्र बनकर यदि इस एक पीढ़ी को बचा लें तो बाद में आगे आने वाली सभी पीढ़िया खुद को बचा लेंगी।
-एजेंसियां

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