राम जन्मभूमि क्षेत्र के समतलीकरण में फिर मिले मंदिर के अवशेष

अयोध्‍या। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गर्भगृह में समतलीकरण कार्य के दौरान मूर्ति युक्त पाषाण के खंभे, प्राचीन कुआं एवं मंदिर की चौखटें मिली हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव एवं विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के उपाध्यक्ष चंपत राय ने बताया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त करने के बाद श्रीराम जन्मभूमि परिसर में भूमि के समतलीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया है।
उन्होंने बताया कि 11 मई से प्रारंभ हुए समतलीकरण के दौरान काफी संख्या में पुरावशेष, देवी देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प, कलश, आमलक, दोरजाम्ब आदि कलाकृतियां, मेहराब के पत्थर, 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तंभ, 6 रेड सैंड स्टोन के स्तंभ, 5 फुट आकार वो नक्काशीयुक्त शिवलिंग आदि अब तक प्राप्त हो चुके हैं।
विहिप नेता व ट्रस्टी चम्पत राय ने बताया कि अयोध्या में रामकोट नाम का एक मोहल्ला है, जिसे कोट किला भी कहा जाता है। वर्षों पहले कोई बहुत बड़ा किला रहा होगा। इस क्षेत्र में दर्जनों मंदिर हैं, जिसमें दशरथ महल, सीता भवन, कोपभवन, कोहबर भवन, सीता रसोई नाम से मंदिर है, जो कि सभी भगवान श्रीराम के जीवन काल से जुड़े हैं।
उल्लेखनीय है कि राम जन्मभूमि के ट्रस्ट गठन इन सबके बीच 0.3 एकड़ की एक भूमि हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है। इसमें सरकार को ट्रस्ट बनाने का निर्देश हुआ और 5 फरवरी, 2020 को सरकार ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। सरकार ने अपने ट्रेजरी से एक रुपए का पहला डोनेशन ट्रस्ट को दिया। ट्रस्ट के गठन के बाद कार्य काफी आगे तक किया जा चुका है।
इस संबंध में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि में समतलीकरण के दौरान मिले मंदिर के अवशेषों से एकबार फिर यह स्पष्ट होता है कि यहां भव्य मंदिर रहा था।
उन्होंने कहा कि जो अवशेष मिल रहे हैं, वे हमारे देश के लिए उस काल की धरोहर के रूप में हैं। इन्हें सावधानीपूर्वक पुरातत्व विशेषज्ञों की निगरानी में निकलवाया जाए। साथ ही इनकी लिस्ट बनाते हुए इन्हें लोकल स्तर पर ही संग्रहित कर इनकी प्रदर्शनी लगाई जाए। उन्होंने कहा की इन धरोहरों के लिए स्थानीय स्तर पर कार्बन डेटिंग लैब की स्थापना की जाए। श्रीरामजन्मभूमि परिसर में चल रहे समतलीकरण के दौरान बड़ी मात्रा में प्राचीन मंदिर के अवशेष मिलने से संत समाज में उल्लास है। इन सभी ने एक स्वर में कहा कि इतनी बहुमूल्य सामग्री मिलने से साबित हो गया कि अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर था, मंदिरों के इस शहर को उजाड़ा गया और देश की शीर्ष कोर्ट में सुनवाई के बाद साबित हो ही गया कि यहां मंदिर था।
आचार्य सतेंद्र दास ने कहा कि अब किसी को मंदिर का प्रमाण देने की जरूरत नहीं है। दस दिनों से चल रहे समतलीकरण के काम से सारे प्रमाण धरातल पर आ गए हैं। राम दास विलास वेदांती ने कहां कि रेड सैंड स्टोन के विशाल पिलर साबित कर चुके हैं कि अयोध्या भगवान राम की नगरी थी। महंंत कन्हैया दास ने कहा कि आंख के सामने ही सारा सच आ गया है। अब तो किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि अयोध्या में क्या था।
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *