रिलायंस का दावा: समुद्र की लाल काई से रोका जा सकता है कोरोना

मुंबई। कोरोना वायरस को ठीक करने का इलाज फिलहाल चाहे दुनिया को न मिला हो लेकिन एक ऐसी खोज हुई है जिससे कोरोना को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है। यह चमत्कारी चीज मिली है समुद्र के अंदर।
रिलायंस का दावा है कि समुद्र में पाई जाने वाली लाल काई (Marine red algae) की मदद से कोरोना को फैलने से रोका जा सकता है।
रिलायंस की स्टडी की मानें तो लाल काई से जो जैव रासायन निकलेगा उसकी मदद से कोटिंग पाउडर तैयार किया जा सकता है। उस कोटिंग को अगर सैनिटरी आइटम्स पर किया जाएगा तो कोरोना नहीं फैल पाएगा। सैनिटरी के सामान में टंकी, सिंक, टॉइलेट सीट जैसी तमाम चीजें आ जाती हैं। कोरोना वायरस की वजह से अब तक दुनियाभर में एक लाख से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। फिलहाल दुनियाभर के डॉक्टर, शोधकर्ता इसका इलाज खोजने में लगे हैं।
क्या निकला है रिसर्च में
यह रिसर्च मुख्य तौर पर कैरीगीरिन पर हुई। कैरीगीरिन समुद्री काई का ही प्रकार है जिसे खाने में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। पाया गया कि कैरीगीरिन कई तरह के वायरसों के लिए अवरोधकों का काम करती है। रिसर्च पेपर के मुताबिक इस तरह की काई से निकलनेवाले Polysaccharides कोरोना वायरस से लड़ने में एंटीवायरल एजेंट के रूप में काम करते हैं इसलिए अगर इनकी कोटिंग बनाकर की जाए तो कोरोना का प्रसार रोका जा सकता है।
कोटिंग से वायरस कई हद तक फैलने से रुक सकता है। क्योंकि अब तक आया है कि कोरोना किसी भी सतह पर लंबा टिक सकता है लेकिन अगर समुद्री लाल काई की कोटिंग वायरस को रोक पाती है तो यह काफी हद तक ठीक होगा।
रिलायंस के लिए यह रिसर्च विनोद नागले, महादेव गायकवाड़, योगेश पवार और शांतनु दासगुप्ता ने किया है। ये सभी वैज्ञानिक रिलायंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (नवी मुंबई) में काम करते हैं। उन्होंने अपने शोध में लाल काई से जुड़ा यह दावा किया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी पहले ही रिलायंस के रिसर्च से जुड़ी कुछ बातें उनके कर्मचारियों से साझा कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि रिलायंस लाइफ साइंस भारत में कोरोना जांच को और बढ़ाने में मदद कर रही है।
-एजेंसियां

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