चालू वित्त वर्ष में कारोबार न करने वाली एक लाख से अधिक companies का पंजीकरण रद्द

नई दिल्‍ली। केंद्र के कॉरपोरेट मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष में लंबे समय से कारोबारी गतिविधियां नहीं करने वाली एक लाख से ज्यादा companies का पंजीकरण रद्द कर दिया है। कॉरपोरेट मंत्रालय ने इन companies में अवैध रूप से धन के प्रवाह पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया है। मंत्रालय को आशंका थी कि इनका संचालन मुखौटा companies के तौर पर किया जा रहा था।

केंद्रीय कॉरपोरेट राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने शुक्रवार को बताया कि कंपनी कानून-2013 के तहत अगर किसी कंपनी में लगातार दो वर्षों तक कारोबारी गतिविधियां नहीं होती हैं तो उसका पंजीकरण निरस्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने 31 दिसंबर, 2017 तक 2.26 लाख कंपनियों का नाम कंपनी रजिस्टर से हटाया था जबकि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान ऐसी 2,25,910 कंपनियों की पहचान की गई है। इसमें से 1,00,150 कंपनियों के नाम धारा-248 के तहत अब तक रजिस्टर से हटाए जा चुके हैं।

कंपनियों में फंसे कर्ज के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनसीएलटी के पास एनपीए का कोई डाटा नहीं होता लेकिन दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 31 अक्तूबर, 2018 तक एनसीएलटी ने 65 कॉरपोरेट कर्जदाताओं को 60,630 करोड़ रुपये के समाधान का आदेश जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने 30 नवंबर, 2018 तक 26,290 मामलों का निपटान भी किया है।
-एजेंसी

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