RBI ने कहा, COVID-19 की वजह से आर्थिक सुधार के नजरिए में बदलाव

मुंबई। केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक RBI ने अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के ग्रोथ पर महामारी के गहराते प्रभाव पर भारत के आर्थिक सुधार के नजरिए में तेजी से बदलाव किया है।
भारतीय रिजर्व बैंक RBI ने कहा, ‘COVID-19 के प्रकोप से पहले 2020-21 के लिए विकास के नजरिए में सुधार की गुंजाइश दिख रही थी। “COVID-19 महामारी से यह दृष्टिकोण बदल गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था इस मौजूदा साल 2020 में मंदी में जा सकती है, जैसा कि COVID-19 के बाद के शुरुआती अनुमानों के संकेत मिलता है।
मार्च तिमाही बुरी तरह से होगा प्रभावित
भारत की अर्थव्यवस्था ने 2019 के आखिरी तीन महीनों में छह वर्षों से अधिक समय की अपेक्षा अपनी सबसे धीमी गति से विस्तार किया और पूरे साल में 5% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया जो एक दशक से अधिक में सबसे कम था। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन मार्च में समाप्त तिमाही के विकास बुरी तरह से प्रभावित करने वाला है और विश्लेषकों ने अपने 2020/21 के जीडीपी की वृद्धि के अनुमानों को 1.5-2% तक घटा दिया है, जैसा कि दशकों तक भारत में कभी नहीं हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय क्रूड की कीमतों का लाभ भी हुआ प्रभावित
RBI ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय क्रूड की कीमतों का लाभ भी कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित लॉकडाउन और इससे उत्पन्न आर्थिक नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता। “हालांकि इसके प्रसार को सीमित करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। COVID-19 घरेलू लॉकडाउन के माध्यम से सीधे भारत में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करेगा।आरबीआई ने पिछले महीने के अंत में एक आपात कदम उठाते हुए अपनी प्रमुख ऋण दर में उम्मीद से अधिक 75 बेसिस पॉइंट की कटौती की और घरेलू बाजारों में रुपये और डॉलर की तरलता को बढ़ाने के लिए कई अन्य उपायों की घोषणा की।
भारत में 5,000 से ज्यादा कोरोना के मरीज
केंद्रीय बैंक ने कहा कि दूसरे दौर का आर्थिक प्रभाव वैश्विक व्यापार और विकास की गति को धीमा करके करेंगे। आरबीआई ने पिछले महीने अपने नीतिगत बयान में दोहराया था कि स्थितियां बेहद अनिश्चित बनी हुई हैं और वह जीडीपी वृद्धि पर कोई अनुमान देने से परहेज कर रहा है। वर्तमान माहौल को अत्यधिक तरल (highly fluid) बताते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह COVID-19 की तीव्रता, प्रसार और अवधि” का आकलन कर रहा है। भारत में गुरुवार सुबह तक कोरोना के 5000 से अधिक सक्रिय मामलों और 166 मौतों की पुष्टि हुई है।
मुद्रास्फीति का असर
फरवरी में 6.58 % की तुलना में भारत की रिटेल मुद्रास्फीति मार्च में चार महीने के निचले स्तर 5.93 % तक धीमी होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में सीपीआई मुद्रास्फीति को जून तिमाही में 4.8 %, सितंबर तिमाही में 4.4%, दिसंबर तिमाही में 2.7% और वित्त वर्ष 2020/21 की मार्च तिमाही में 2.4% तक कम करने का प्रोजेक्ट किया गया है ।
आरबीआई ने कहा कि अनुमान इस चेतावनी के साथ आते हैं कि मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए, कुल मांग वर्तमान में उम्मीद से अधिक कमजोर हो सकती है और कोर मुद्रास्फीति को और नीचे धकेल सकती है, जबकि आपूर्ति बाधाएं उम्मीद से अधिक दबाव डाल सकती हैं। आरबीआई ने कहा कि बड़े पैमाने पर लिक्विडिटी भी संभावित रूप से लंबे समय में कीमतों में इजाफा कर सकती है लेकिन मुद्रास्फीति के अनुमानों के आसपास जोखिम इस समय संतुलित दिखाई देते हैं।
-एजेंसियां

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