RBI के डेप्युटी गवर्नर विरल आचार्य ने इस्‍तीफा दिया

नई दिल्‍ली। RBI विरल आचार्य ने (भारतीय रिजर्व बैंक) के डेप्युटी गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले छह महीने में RBI से इस्तीफा देने वाली आचार्य दूसरे बड़े पदाधिकारी हैं। उनका कार्यकाल 20 जनवरी 2020 को पूरा होना था लेकिन छह महीने पहले ही उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। उर्जित पटेल का RBI के डेप्युटी गवर्नर पद से गवर्नर पद पर 4 सितंबर 2016 को प्रमोशन हुआ तो आचार्य को उनकी जगह डेप्युटी गवर्नर का पद दिया गया था।
उर्जित पटेल के करीबी थे आचार्य
आचार्य का उर्जित पटेल से काफी करीबी संबंध था इसलिए 10 दिसंबर 2018 को जब उर्जित पटेल ने RBI गवर्नर पद छोड़ा तो कइयों को लगा कि शायद आचार्य भी इस्तीफे का ऐलान कर देंगे। हालांकि, वह पद पर बने रहे और वित्तीय मामलों एवं RBI के प्रति सरकार के नजरिए की खुलकर आलोचना करते रहे।
कई मायनों में विरले के विरल
विरल आचार्य एक नहीं, बल्कि कई मामलों में एक गवर्नर के रूप में विरले थे। उन्हें महज 42 वर्ष की उम्र में इतना सीनियर पोस्ट मिल गया था। आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर इंजिनियरिंग की डिग्री लेने वाले आचार्य को साल 1995 में प्रेसीडेंट मेडल से भी नवाजा गया था। उन्होंने न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की।
मैं गरीबों की रघुराम राजन हूं: आचार्य
आचार्य नीति-निर्माताओं के बीच महंगाई पर कड़ा रुख अख्तियार करने वाले के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने कहा भी था कि वह ‘गरीबों के रघुराम राजन’ हैं इसलिए रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) जब कभी भी महंगाई के प्रति नरम रुख दिखाती, वह अक्सर विरोध में खड़े हो जाते।
संगीत के शौकीन
आचार्य की शख्सियत का एक दूसरा पहलू भी था। एक बार उन्होंने केंद्र सरकार और RBI के बीच के रिश्ते की व्याख्या हिंदी फिल्मों के गानों की पक्तियों से की। संगीत में बेहद दिलचस्पी रखने वाले आचार्य ने न्यू यॉर्क में खुद से कंपोज किए गानों की एक सीडी लॉन्च की थी और इससे हुई आमदनी परोपकार पर खर्च कर दी थी।
इस बयान से बटोरी थी चर्चा
आचार्य RBI के डेप्युटी गवर्नर के रूप में 26 अक्टूबर 2018 को चर्चा में आ गए जब उन्होंने RBI की स्वायत्ता से समझौता करने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई। तब उन्होंने कहा था कि जो सरकारें अपने केंद्रीय बैंकों की स्वायत्तता का सम्मान नहीं करतीं, उन्हें देर-सबेर वित्तीय बाजारों के आक्रोश का सामना करना ही पड़ता है। आचार्य के उस संबोधन से RBI और सरकार के बीच के रिश्तों में दरार पड़नी शुरू हो गई थी।
हालांकि, बाद में खबरें आईं कि सरकार ने RBI के 83 साल के इतिहास में पहली बार सेक्शन 7 के इस्तेमाल की धमकी दी थी। कहा गया कि सरकार के इस कदम ने विरल आचार्य को उकसाने का काम किया।
शिक्षा जगत में जाने की अटकलें
बहरहाल, आचार्य ने अपनी आगे की योजना का ऐलान नहीं किया है, लेकिन कहा जा रहा है कि वह पठन-पाठन की दुनिया में जाएंगे। आरबीआई के सूत्रों का मानना है कि आचार्य के इस्तीफे का अमेरिका में नए सत्र के लिए शिक्षकों की भर्तियों का दौर शुरू होने से कुछ संबंध हो सकता है। कहा जा रहा है कि आचार्य ने गवर्नर शक्तिकांत दास को इस्तीफे के अपनी मंशा से अवगत कराया है। फिर दास ने इसकी जानकारी वित्त मंत्री को दी।
ऐसे होती है RBI गवर्नरों की नियुक्ति
गौरतलब है कि आरबीआई के गवर्नर और डेप्युटी गवर्नरों की नियुक्ति सीधे सरकार करती है। हालांकि, डेप्युटी गवर्नरों की नियुक्ति में गवर्नर की राय ली जाती है। चार डेप्युटी गवर्नरों में दो का चयन आरबीआई के अंदर से होता है जबकि एक किसी कमर्शल बैंकिंग सेक्टर से लाए जाते हैं और किसी अर्थशास्त्री को चौथा डेप्युटी गवर्नर बनाया जाता है।
अब बचे ये तीन डेप्युटी गवर्नर
अभी सबसे सीनियर डेप्युटी गवर्नर एन एस विश्वनाथन का कार्यकाल अगले महीने खत्म होने वाला है। लोकसभा चुनाव और फिर नए सरकार के गठन की भागदौड़ में उनकी जगह नए डेप्युटी गवर्नर की खोज नहीं हो सकी, इसलिए संभव है कि सरकार उनके कार्यकाल का विस्तारदे। विश्वनाथन के अलावा आरबीआई के अंदर से बने एक अन्य डेप्युटी गवर्नर बी पी कानूनगो हैं। वहीं, महेश कुमार जैन पूर्व बैंकर हैं।
-एजेंसियां

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