RBI की MPCC ने किया नीतिगत दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला

नई दिल्ली। RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति MPCC ने उम्मीद के मुताबिक नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया। इसके साथ ही मुख्य नीतिगत दर रीपो 6 प्रतिशत पर बरकरार है जो पिछले साढ़े छह साल का न्यूनतम स्तर है। वहीं, रिवर्स रीपो रेट भी 5.75 प्रतिशत जबकि सीआरआर 4 प्रतिशत पर कायम है। हालांकि, एसएलआर 0.5% घटाकर 19.5% कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि MPCC की सदस्य प्रोफेसर ढोलकिया ने कम-से-कम 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की राय रखी थी लेकिन समिति ने उनकी बात नहीं मानी।
गौरतलब है कि पिछली बार अगस्त महीने में मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद RBI ने रीपो रेट और रिवर्स रीपो रेट में 0.25% कटौती का ऐलान किया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने उम्मीद जताई थी कि RBI आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए इस बार की मौद्रिक नीति समीक्षा में भी नीतिगत दर में कटौती करेगा।
RBI का कहना है कि कृषि ऋण माफी से ग्रोथ पर असर पड़ेगा।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को जो एचआरए दिया है, वह खर्च होने पर इकॉनमी में तेजी आएगी।
रिजर्व बैंक ने अक्टूबर-मार्च छमाही में महंगाई 4.2-4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
इसके मुताबिक जनवरी से मार्च तिमाही में महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रह सकती है।
उधर, कई विशेषज्ञों और उद्योग मंडलों ने भी मुद्रास्फीति में कमी और आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये तत्काल कदम उठाए जाने के मद्देनजर प्रमुख नीतिगत दर में कटौती पर जोर दिया था। हालांकि, बैंक के शीर्ष अधिकारियों ने मुद्रास्फीति में वृद्धि को देखते हुए प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं होने का अनुमान जताया था।
देश के सबसे बड़े बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि RBI 4 अक्टूबर को मौद्रिक नीति समीक्षा में यथास्थिति बनाए रख सकता है। वह निम्न वृद्धि, मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच फंस गया है। वहीं, मॉर्गन स्टैनली ने भी एक रिसर्च रिपोर्ट में मौद्रिक नीति समीक्षा में यथास्थिति बरकरार रखे जाने की बात कही थी। उसने इसकी वजह बढ़ती मुद्रास्फीति और इसमें और बढ़ोत्तरी बताया।
गौरतलब है कि केंद्रीय बैंक ने अगस्त महीने में पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में मुद्रास्फीति जोखिम में कमी का हवाला देते हुए रीपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 6 प्रतिशत कर दिया था। हालांकि अगस्त महीने में खुदरा मुद्रास्फीति सब्जी और फलों के महंगा होने के कारण पांच महीने के उच्च स्तर 3.36 प्रतिशत पर पहुंच गई। जुलाई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 2.36 प्रतिशत थी।
-एजेंसी