बसपा के “वीटो” से कुंवर नरेंद्र सिंह बने मथुरा में राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्‍याशी

लखनऊ/मेरठ। यूपी के महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोकदल ने मंगलवार को अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया, आज जारी टिकटों की सूची में पार्टी अध्यक्ष अजीत चौधरी को पश्चिम यूपी की प्रतिष्ठित मुजफ्फरनगर सीट से प्रत्याशी बनाया गया है जबकि जयंत चौधरी को बागपत का। रालोद के तीसरे और अंतिम प्रत्‍याशी के तौर पर मथुरा से कुंवर नरेन्‍द्र सिंह के नाम की घोषणा की गई है। इन तीनों सीटों पर आरएलडी बीएसपी और एसपी के समर्थन के साथ चुनाव लड़ेगी।

पार्टी सूत्रों से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार कुंवर नरेन्‍द्र सिंह को रालोद प्रत्‍याशी घोषित कराने में बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ी भूमिका अदा की।

मायावती ने जयंत चौधरी को 16 मार्च के दिन तलब किया था, देखिए वीडियो- 

Jayant chaudhary met with Mayawati For Seat Sharing

Jayant chaudhary met with Mayawati For Seat Sharingजयंत और मायावती में सभी 80 सीटों पर कैसे लड़ा जाएगा, इसकी रणनीति बनी है। कौन कैसा सहयोग देगा, इस पर चर्चा हुई. -Legend News

Posted by Legend News on Saturday, March 16, 2019

गौरतलब है कि पिछले दिनों मथुरा से प्रत्‍याशी को लेकर दिल्‍ली में रालोद की जो बैठक हुई उसमें पत्रकार विनीत नारायण का नाम तय कर दिए जाने के बाद पार्टी की मथुरा इकाई के अंदर भारी रोष व्‍याप्‍त हो गया।
पार्टी अभी विनीत नारायण का नाम बाकायदा घोषित कर पाती कि इससे पहले गठबंधन के कुछ लोगों की सहमति से स्‍थानीय नेताओं ने बसपा सुप्रीमो मायावती के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई और बताया कि विनीत नारायण का नाम कुछ खास शर्त पूरी करने के बाद तय किया गया है जबकि उनका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं रहा।
इन नेताओं का कहना था कि यदि विनीत नारायण को प्रत्‍याशी घोषित किया गया तो गठबंधन के साथ-साथ मथुरा रालोद भी कोई सहयोग नहीं कर सकेगा।
इन लोगों ने बसपा सुप्रीमो को अंदरखाने की गई विशेष कारगुजारी से भी अवगत कराया।
उल्‍लेखनीय है कि मथुरा रालोद में फिलहाल ऐसे कई नेता हैं जो पूर्व में सपा तथा बसपा में भी रह चुके हैं और उनके मायावती तथा अखिलेश दोनों से सीधे संबंध हैं।
ऐसे नेताओं ने मायावती के अलावा अखिलेश को भी वस्‍तुस्‍थिति से अवगत कराया। इसके बाद पहले तो मायावती और अखिलेश के बीच मथुरा की सीट को लेकर मंत्रणा हुई और उसके बाद जयंत चौधरी को मायावती ने 16 मार्च के दिन तलब किया।
बताया जाता है कि मायावती ने जयंत चौधरी से साफ-साफ कह दिया कि विरोध एवं आक्रोश को देखते हुए विनीत नारायण का नाम उन्‍हें भी स्‍वीकार नहीं है लिहाजा किसी अन्‍य नाम पर विचार किया जाए।
चूंकि मथुरा के लिए सर्वसम्‍मति ठाकुर तेजपाल के नाम पर पहले बन चुकी थी इसलिए उस पर विचार किया जा सकता था किंतु उन्‍हें लड़वाने के पक्ष में जयंत चौधरी कतई नहीं थे। हालांकि आरएलडी सुप्रीमो अजीत सिंह ठाकुर तेजपाल को ही चुनाव लड़ाना चाहते थे।
बहरहाल, बसपा सुप्रीमो मायावती के वीटो ने विनीत नारायण का बना बनाया खेल बिगाड़ दिया और कुंवर नरेन्‍द्र सिंह की लॉटरी लगवा दी।
बताया जाता है कि भाजपा कुंवर नरेन्‍द्र सिंह का नाम घोषित होने से काफी खुश है क्‍योंकि कुंवर नरेन्‍द्र सिंह का चुनावी करियर अब तक बहुत पूअर रहा है।

इससे पहले कैराना की सीट पर आरएलडी की प्रत्याशी तबस्सुम हसन को उपचुनाव में जीत मिली थी, जिन्हें इस बार महागठबंधन की ओर से इसी सीट का प्रत्याशी बनाया गया है। हालांकि तबस्सुम हसन कैराना की सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली हैं।

मुजफ्फरनगर में अजीत के सामने असली परीक्षा
मुजफ्फरनगर सीट पर समाजवादी पार्टी (एसपी), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) गठबंधन की तरफ से चौधरी अजित सिंह चुनाव मैदान में हैं। यह चुनाव अजित सिंह की चौधराहट की असली परीक्षा लेगा। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद आरएलडी का वोटबैंक पूरी तरफ से बिखर चुका है। वर्ष 2013 में दंगे के बाद ध्रुवीकरण और मोदी लहर में बीजेपी ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यह सीट 4,01,135 मतों से जीती थी। अभी आरएलडी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। अगर गठबंधन यह सीट निकाल लेता है तो यह चौधरी परिवार की राजनीति के लिए संजीवनी का काम करेगी। इस लिहाज से इस सीट पर पूरे देश की नजर रहेगी।

जाटों के गढ़ बागपत में हारे थे अजीत सिंह
अजीत चौधरी के बेटे जयंत चौधरी इस बार बागपत सीट से प्रत्याशी बनाए गए हैं। जाटों का गढ़ माने जाने वाले बागपत में आरएलडी को बड़ा झटका तब लगा, जब पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रमुख अजित सिंह को यहां से हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी के सत्यपाल सिंह ने इस सीट से 2 लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। इस बार इस सीट पर पूरे देश की नजर रहेगी। माना जा रहा है कि बीजेपी यहां से एक बार फिर सत्यपाल सिंह को मौका दे सकती है। गठबंधन के लिहाज से देखें तो बीजेपी के सामने इस बार कड़ी चुनौती होगी। जयंत चौधरी के दादा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह यहां से 1977, 1980 और 1984 में लगातार चुनाव जीते हैं। जयंत के पिता और आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह 6 बार 1989, 1991, 1996, 1999, 2004 और 2009 में बागपत से सांसद रहे।

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