सीट बंटवारे को लेकर आज शाम अमित शाह से मिलेंगे रामविलास और चिराग Paswan

राजनैतिक चर्चा में है एनडीए का बिछुडता कुनबा, Paswan की लोजपा का दवाब राज्यसभा सीट के लिए

नई दिल्ली। लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) सुप्रीमो और केंद्रीय मंत्री रामविलास Paswan को एनडीए में बनाए रखने के लिए कवायद तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि नाराज पासवान को मनाने के लिए गुरुवार शाम को बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव मुलाकात करने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान सीट बंटवारे को लेकर चर्चा होगी। भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद रामविलास पासवान और उनके सांसद पुत्र चिराग पासवान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से भी मुलाकात करेंगे।

कहानी अब भी अधूरी ही है

पहले एनडीए से अलग हुए मांझी, कुशवाह और अब चिराग Paswan की ट्वीट… कहानी अब भी अधूरी ही है। यूं तो बिहार की राजनीति बीते लोकसभा चुनाव के बाद से ही बीजेपी के लिए आसान नहीं रही है। विधानसभा चुनाव के बाद ही जीतनराम मांझी ने साथ छोड़ दिया था। उसके बाद जदयू (JDU) साथ आया तो रालोसपा (RLSP) की नाराजगी बढ़ गई और आखिर में उसने भी साथ छोड़ दिया। अब लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने कहा कि उन्हें ज्यादा सीटें नहीं चाहिए। उधर, लोजपा के बिहार अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने बीजेपी को 31 दिसंबर तक सीटों का बंटवारा कर लेने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि पहले से कम सीटें उन्हें मंजूर नहीं।

जदयू भी नए फार्मूले पर भाजपा की छह संसदीय सीटें ले रहा है। कमजोर पड़ रही बीजेपी के सामने लोजपा ने भी साथ छोड़ने की परोक्ष धमकी दे दी है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी इस मामले पर रामविलास पासवान से बात करेगी, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर लोजपा के अल्टीमेटम पर काम नहीं करेगी।

2019 लोकसभा चुनाव के लिए एलजेपी, बीजेपी से सीट बंटवारे पर स्पष्टता चाहती है। एनडीए में बिहार से एलजेपी के अलावा जेडीयू भी है। बीजेपी और और जेडीयू ने सीट बंटवारे पर काफी पहले ही चर्चा कर ली है। दोनों पार्टियां बराबर सीट पर चुनाव लड़ेंगी लेकिन एलजेपी को कितनी सीटें मिलनी है, इस पर अभी तक कोई स्पष्ट ऐलान नहीं हुआ है। 2014 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए में शामिल हुए रामविलास पासवान ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा था।

राज्यसभा सीट भी एक वजह
सूत्रों के अनुसार, लोजपा का दवाब राज्यसभा सीट के लिए ज्यादा है। वह अपने नेता रामविलास पासवान को राज्यसभा में लाना चाहती है। भले ही लोकसभा में उसे एक-दो सीट कम मिले। भाजपा फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं है। चिराग पासवान का ट्वीट भी इसी दबाब का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, बीजेपी का कहना है कि सीटों के बंटवारे को लेकर इस तरह के बयान आते रहते हैं, कोई बड़ी समस्या नहीं है।

भाजपा अंदरूनी तौर पर लोजपा के रुख को लेकर सशंकित है। रामविलास पासवान माहौल देखकर पाला बदलते रहे हैं और 1996 के बाद एक बार (2009) को छोड़कर हर सरकार में मंत्री रहे हैं। चाहे वह भाजपा की हो, कांग्रेस की हो या तीसरे मोर्चे की। ऐसे में लोकसभा चुनावों से पहले तीन राज्यों की सरकारें गंवाने से भाजपा का पक्ष कमजोर पड़ रहा है। सहयोगी दल इसी का लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।
-एजेंसी

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