मुकुट मुखारविंद मंदिर से रमाकांत गोस्‍वामी की छुट्टी, कोर्ट ने किया पदमुक्त

एक प्रतिष्‍ठित परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले और एक प्रतिष्‍ठित पद पर प्रतिष्‍ठापित कथावाचक रमाकांत गोस्‍वामी को आज उसी कोर्ट ने मुकुट मुखारविंद मंदिर के रि‍सीवर पद से मुक्‍त कर दिया जिसने उन्‍हें यह ज़िम्‍मेदारी सौंपी थी।
पद पर रहते हुए मंदिर की धन-संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने तथा करोड़ों रुपए की अनियमितता के आरोपी रमाकांत गोस्‍वामी को उनके सहयोगियों सहित हटाने के साथ-साथ कोर्ट ने उन सभी को मंदिर से फिलहाल बेदखल कर दिया है जो उनके साथ SIT की FIR में नामजद किए गए हैं।
कोर्ट ने तब तक के लिए अधिवक्‍ता कौशलेन्‍द्र को मंदिर का नया रिसीवर नियुक्‍त करते हुए अगली सुनवाई के लिए 18 अगस्‍त की तारीख नियत की है।
गौरतलब है कि गोवर्धन स्‍थित विश्‍व प्रसिद्ध मंदिर मुकुट मुखारविंद में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच और उसके उपरांत दर्ज हुई FIR पर सवाल उठाने वाली रमाकांत गोस्‍वामी की याचिका को हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
आरोपी का तर्क था कि उसे चूंकि कोर्ट से रिसीवर नियुक्‍त किया गया था लिहाज़ा न तो मंदिर में हुए किसी घोटाले की जांच करने का प्रशासन को अधिकार था और न ही उस जांच के आधार पर SIT कोई FIR दर्ज करा सकती थी।
उल्‍लेखनीय है कि करीब 3 वर्ष पूर्व इंपीरियल पब्‍लिक फाउंडेशन नामक एनजीओ ने गोवर्धन स्‍थित विश्‍व प्रसिद्ध मंदिर मुकुट मुखारविंद में करोड़ों रुपए का घोटाला किए जाने की शिकायत तहसील दिवस पर प्रार्थना प्रत्र देकर की थी।
इस शिकायत के बाद तत्‍कालीन जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्रा द्वारा मामले की जांच गोवर्धन के तत्‍कालीन एसडीएम नागेन्‍द्र कुमार सिंह को सौंप दी गई।
एसडीएम नागेन्‍द्र कुमार सिंह ने अपनी जांच में प्रथम दृष्‍ट्या रिसीवर रमाकांत गोस्‍वामी पर लगाए गए सभी आरोपों को सही पाया, बावजूद इसके यूपी SIT ने अपने स्‍तर से फिर इस मामले की जांच की।
जांच पूरी करने के बाद यूपी SIT के निरीक्षक कुंवर ब्रह्मप्रकाश ने अपने यहां क्राइम नंबर 0010/20120 पर यह मामला 11 सितंबर 2020 की शाम 6 बजकर 46 मिनट पर दर्ज करा दिया।
तब से यह मामला पता नहीं किन कारणोंवश लटका रहा लिहाज़ा इसमें मुख्‍य आरोपी रमाकांत गोस्‍वामी या किसी अन्‍य आरोपी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई।
SIT की इसी ढील का फायदा उठाकर मुख्‍य आरोपी रमाकांत गोस्‍वामी अपने बचाव में कोई न कोई नया हथकंडा इस्‍तेमाल करते रहे।
बहरहाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 13 जुलाई को रमाकांत गोस्‍वामी की याचिका का निस्‍तारण करते हुए अपने आदेश में लिखा है कि एसडीएम गोवर्धन की जांच और SIT द्वारा दर्ज कराई गई FIR से याचिकाकर्ता के किसी अधिकार का हनन होता प्रतीत नहीं हुआ इसलिए याचिका खारिज की जाती है।
इतना सब हो जाने पर भी रमाकांत गोस्‍वामी खुलेआम ऐलान करते रहे कि उनका या उनके साथी का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इन सब स्‍थिति-परिस्‍थितियों को देखते हुए इंपीरियल पब्‍लिक फाउंडेशन के अध्‍यक्ष रजत नारायण ने गत दिनों प्रदेश के डीजीपी सहित उच्‍च न्‍यायालय को भी एक प्रार्थना पत्र देकर तत्‍काल न्‍यायसंगत कार्यवाही करने की मांग की थी।
अब कोर्ट द्वारा तथ्‍यों के आधार पर की गई इस कार्यवाही से लोगों में मुकुट मुखारविंद मंदिर की संपत्ति सुरक्षित होने के अलावा इस बात को लेकर भी विश्‍वास पैदा हुआ है कि संभवत: अब रमाकांत गोस्‍वामी और उनके सहयोगी शीघ्र ही कानून की गिरफ्त में होंगे।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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