मनमोहन सरकार के हर फैसले में दखल देते थे राहुल गांधी: पूर्व विदेश मंत्री

मैसूर। यूपीए 2 के दौरान सरकार के फैसलों में राहुल गांधी के हस्तक्षेप करने का आरोप पूर्व विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने लगाया। कांग्रेस छोड़ चुके कृष्णा ने कहा कि मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष 10 साल पहले सिर्फ सांसद थे, लेकिन वह पार्टी के हर फैसले में दखल देते थे। इस कारण उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी।
कर्नाटक के पूर्व सीएम और मनमोहन सिंह सरकार में विदेश मंत्री रहे एस एम कृष्णा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला। कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो चुके कृष्णा ने कहा कि राहुल गांधी सरकार के कामकाज में लगातार हस्तक्षेप करते थे। राहुल गांधी की दखलंदाजी के कारण उन्हें सरकार और कांग्रेस पार्टी छोड़नी पड़ी। कर्नाटक के पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी किसी के प्रति जवाबदेह नहीं थे और अपनी मर्जी से विधेयकों को महत्व देते थे।
यूपीए 2 में विदेश मंत्री का पद संभालने वाले कृष्णा ने अपने पद छोड़ने का कारण भी राहुल गांधी को बताया। उन्होंने कहा, ‘मेरे कार्यकाल में विदेश मंत्री के तौर पर मेरे विभाग में मनमोहन सिंह का दखल भी नहीं था। राहुल गांधी ने यह फैसला लिया कि 80 पार के नेताओं की पद से छुट्टी करनी है, और इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया। वह किसी के प्रति कोई जवाबदेही नहीं समझते थे। अपनी मर्जी के मुताबिक कुछ विधेयकों को महत्व देते थे और बाकी को लटका देते थे।’
एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष पर बड़ा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के दखल से परेशान होकर उन्होंने विदेश मंत्री का पद छोड़ा था। 2017 में कांग्रेस पार्टी छोड़ने के फैसले पर भी कृष्णा ने कहा कि मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष की हस्तक्षेप करने की आदत ने उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था। पूर्व विदेश मंत्री ने कहा, अपने पास काम करने का कोई और रास्ता नहीं देखकर मैंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया।
कांग्रेस और गठबंधन पार्टियों में तालमेल नहीं होने का लगाया आरोप
राहुल गांधी पर सरकार के महत्वपूर्ण मामलों में भी दखल देने का आरोप कृष्णा ने लगाया। उन्होंने कहा, ’10 साल पहले राहुल गांधी पार्टी में किसी महत्वपूर्ण पद पर नहीं थे। पार्टी से जुड़े हर फैसले में वह हस्तक्षेप करते थे। जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे उस वक्त भी राहुल गांधी के पास कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा के लिए भेजे जाते थे, जबकि पीएम को इस विषय में जानकारी भी नहीं रहती थी। कांग्रेस का गठबंधन की सहयोगी पार्टियों पर कोई नियंत्रण नहीं था। इसी वजह से यूपीए 2 के कार्यकाल में एक के बाद एक कई बड़े घोटाले 2जी स्पैक्ट्रम, कॉमनवेल्थ घोटाला, कोयला घोटाला हुए। ऐसी स्थिति तभी होती है जब कोई निर्णायक नेतृत्व नहीं होता है।’
कृष्णा का दावा, ‘सरकार के फैसलों पर मनमोहन सिंह का नहीं था नियंत्रण’
एस एम कृष्णा ने राहुल गांधी के हस्तक्षेप को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने कहा, ‘2009 से 2014 तक मैं सरकार में था और सरकार के हर अच्छे-बुरे फैसले की जिम्मेदारी मुझ पर बनती है।’ कृष्णा ने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री का सरकार, कैबिनेट और सहयोगी दलों पर कोई नियंत्रण नहीं था। सब कुछ पर कंट्रोल राहुल गांधी का था और वह ऐसे काम कर रहे थे जैसे कि वह कोई अतिरिक्त संवेधानिक संस्था हों।
‘मुझे राहुल गांधी ने विदेश मंत्री पद से हटाया’
विदेश मंत्री पद से इस्तीफा देने की वजह भी कृष्णा ने राहुल गांधी को बताया। उन्होंने कहा कि बतौर विदेश मंत्री साढ़े तीन साल का उनका कार्यकाल बेहतरीन था। उन्हें हटाने का आदेश राहुल गांधी ने दिया क्योंकि वह 80 साल से अधिक उम्र के नेताओं को कैबिनेट में जगह नहीं देना चाहते थे। बीजेपी में शामिल होने के बाद भी कृष्णा सक्रिय राजनीति से लगभग दूर ही हैं। हालांकि, कर्नाटक चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस के पूर्व सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ एक रैली में जरूर हिस्सा लिया था।
-एजेंसियां

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