राबड़ी का नीतीश पर पलटवार: कहा, कमजोर इंसान बहुत गुस्‍सा करता है

पटना। बिहार विधानसभा सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार घमासान देखने को मिला। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सदन में सीएम नीतीश कुमार पर निजी हमले किए, जिस पर मुख्यमंत्री ने भी करारा जवाब दिया। नीतीश कुमार के इस जवाबी हमले पर अब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने टिप्पणी की है। उन्होंने नीतीश कुमार की भाषा पर सवाल उठाए, साथ ही कहा कि वो कुतर्कों के योद्धा बन गए हैं।
नीतीश कुमार की भाषा को लेकर राबड़ी देवी ने उठाए सवाल
राबड़ी देवी ने शनिवार को एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, ‘जब इंसान कमजोर होता है तो गुस्से से आग बबूला हो जाता है। ऐसी क्या बात है कि आजकल नीतीश कुमार जी अपना आपा खोकर संसदीय मर्यादा का त्याग कर नेता प्रतिपक्ष से तू-तड़ाक वाली आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं?’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, नीतीश कुमार कुतर्कों के योद्धा बन गए हैं
राबड़ी देवी ने एक और ट्वीट में लिखा, ‘नीतीश कुमार कुतर्कों के योद्धा बन गए हैं। कह रहे तेजस्वी को उपमुख्यमंत्री बनाया। इनमें लोकलाज बची ही नहीं, बताइए सबसे बड़ी पार्टी और 80 विधायकों के नेता को उपमुख्यमंत्री बना नीतीश ने कौन सा अहसान कर दिया? शुक्रगुज़ार आपको लालू जी का होना चाहिए जो आपको राजनीतिक जीवनदान प्रदान किया।’
विधानसभा में तेजस्वी के निजी हमलों पर भड़क गए नीतीश कुमार
पूरा विवाद तब सामने आया जब शुक्रवार को तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर निजी प्रहार करते हुए कहा था, ‘आपके तो एक बेटे हैं। मुख्यमंत्री के एक बेटे हैं, हैं कि नहीं यह वही बताएंगे… लेकिन हम इतना जरूर कह सकते हैं कि कि हमने चुनाव के दौरान किसी पर निजी हमला नहीं किया और केवल मुद्दे की बात की। मुख्यमंत्री दूसरों के बच्चे गिनते रहे। इनके एक बेटे हैं लेकिन लोग तो यह भी कह सकते हैं कि बेटी के डर से दूसरी संतान क्यों नहीं पैदा किए।’
नीतीश कुमार ने कहा, हम बर्दाश्त करते रहते हैं
तेजस्वी की इस टिप्पणी पर नीतीश कुमार ने सदन में कहा था, ‘हम बर्दाश्त करते रहते हैं। हम कुछ नहीं कहते। इसको उपमुख्यमंत्री किसने बनाया था और इस पर जब आरोप लगा तो हमने कहा कि जनता के बीच जाकर सफाई दें। सफाई नहीं दी तब हमने छोड़ दिया। आज चार्जशीटेड हैं।’ नीतीश कुमार ने आगे कहा था, ‘कोई सत्ता में है, कोई विपक्ष में है। सबकी अपनी-अपनी इच्छाएं हैं। मुझे उस पर कुछ नहीं कहना लेकिन एक बात कहेंगे आग्रहपूर्वक। आगे बढ़ना है तो कुछ मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। कभी अमार्यादित ढंग से कोई काम करने की जरूरत नहीं।’
-एजेंसियां

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