पुण्‍यत‍िथ‍ि: क्यों और क‍िसने की थी लल‍ित माकन व गीतांजल‍ि माकन की हत्‍या

नई दिल्ली। भारत के नौवें राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा की बेटी बेटी गीतांजलि माकन व दामाद तथा कांग्रेस नेता ललित माकन और  की 31 जुलाई 1985 को आतंकवादियों ने दिल्ली में उनके घर के सामने हत्या कर दी थी। हत्या का कारण 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगे में माकन की भूमिका को बताया जाता है।

ललित माकन सहित अन्य कांग्रेसी नेताओं पर सिखों के खिलाफ दंगा भड़काने का आरोप है। इसमें एचकेएल भगत, ललित माकन, जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार सहित नौ नाम प्रमुख थे।

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में भड़की ह‍िंसा को एक सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। इन नेताओं के पास दिल्ली की मतदाता सूची थी। इसमें इन्होंने सिख लोग कहां-कहां रहते हैं इस पर टिक कर दिया था। इसके बाद रात के समय सिख लोग जहां रहते थे उनके घर की दीवार पर एस लिख दिया। कांग्रेस नेताओं ने आग लगाने के लिए अपने पेट्रोल पंपों से दंगाइयों को पेट्रोल दिया। दंगाई रैली के रूप में निकले।

इनका नेतृत्व इन कांग्रेसी नेताओं ने अलग-अलग क्षेत्रों में किया। दंगाइयों ने सिख लोगों पर कहर ढा दिया। इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा नरसंहार कहा जाता है।

इस तरह लिया बदला
दिल्ली में दंगे करीब चार दिन हुए। हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। जो सिख किसी तरह बच गए थे उन्होंने बाद में इन दंगों के लिए बनी जांच कमेटियों में कांग्रेस के इन नेताओं के नाम बताए। 31 जुलाई 1985 को कृति नगर में मौजूद अपने निवास पर लोगों से मुलाकात के बाद माकन अपनी कार में बैठ रहे थे तभी मौके पर स्कूटर व ऑटो से आए तीन आतंकियों ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी। इस घटना में ललित माकन, उनकी पत्नी गीतांजलि व सहयोगी बाल किशन की मौत हो गई थी जबकि सुरेश मलिक घायल हो गए थे।

दोषियों को हुई उम्र कैद
दिल्ली हाई कोर्ट ने अभियुक्त रणजीत सिंह गिल की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी थी। निचली अदालत ने रणजीत सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 21 फरवरी, 1987 को अपने बयान में सुखदेव सिंह ने पुलिस को बताया था कि माकन हत्याकांड में उसका हाथ है। उसने इस मामले में अन्य अभियुक्तों सुखविंदर व रणजीत सिंह का भी नाम लिया था। रणजीत सिंह फरार हो गया और अमेरिका भाग गया। उसके नाम रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मई, 2000 में उसे प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया और फिर हत्या का मुकदमा चला।

-एजेंसी

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