1967 के नक्सली आंदोलन में भी दिखी थी पंजाब के अंदर वामपंथियों की सक्रियता

कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के किसानों के अलावा देश भर के किसान संगठन एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच पंजाब के किसान प्रदर्शनकारियों के आंदोलन में अल्ट्रा-लेफ्ट एक्टिविस्ट्स की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, वामपंथियों से पंजाब का नाता कोई नई बात नहीं है। साल 1967 के नक्सली आंदोलन के समय भी पंजाब में वामपंथियों की सक्रियता देखने को मिली थी।
पंजाब में राज्य सरकार द्वारा नक्सली आंदोलन को बलपूर्वक कुचल दिया गया था। इस दौरान 85 अल्ट्रा-लेफ्ट एक्टिविस्ट्स को एलिमिनेट किया गया था, जिसमें एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबा बुझा सिंह भी शामिल थे, जो बाद में नक्सली आंदोलन में शामिल हो गए थे। इस दौरान आंदोलन के कुछ जो युवा बच गए थे, उन्होंने बाद में एक्टिविज्म, जॉर्नलिज्म और साहित्यिक क्षेत्रों में प्रमुखता से काम किया।
शुरुआत में ही पंजाब पहुंच गया था नक्सली मूवमेंट
स्वर्गीय हरभजन सिंह हलवारवी उनमें से एक थे, जो बाद में एक पंजाबी दैनिक के कई सालों तक एडिटर रहे। सिंह को एक आईपीएस ऑफिसर सिमरनजीत सिंह मान ने बचाया था। हरभजन सिंह को एक ऐसे पुलिस अधिकारी ने अपनी हिरासत में रखा था, जो नक्सली आंदोलन को कुचलने के लिए जाना जाता है। आंदोलन में शामिल रहे अजमेर सिंह ने बताया कि साल 1967 में नक्सली मूवमेंट शुरू होने के साथ ही पंजाब पहुंच गया था।
छात्रों-बुद्धिजीवियों में लोकप्रिय हुआ था आंदोलन
सिंह ने बताया, ‘हालांकि यह छात्रों और कुछ बुद्धिजीवियों के बीच में ही लोकप्रिय हुआ। किसी बड़े जननेता ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। सीपीआई और सीपीएम के कुछ कैडर इसमें शामिल हुए थे।’ अजमेर सिंह आंदोलन में तब शामिल हुए थे जब वह गुरुनानक इंजिनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग के तृतीय वर्ष के छात्र थे। मूवमेंट के समय साल 1970 में वह अंडरग्राउंड रहे थे।
ऑपरेशन ब्लू स्टार बना टर्निंग पॉइंट
अजमेर ने बताया कि नक्सलियों द्वारा हिंसा के शुरुआती चरण में ही राज्य सरकार ने उन्हें कुचलने की नीति पर काम करना शुरू कर दिया था। तब प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने बताया कि इसके बाद एक दशक तक ओवरग्राउंड संगठन काफी बढ़ गए जबकि कोर ग्रुप अभी भी अंडरग्राउंड रहा। साल 80 के दशक के शुरुआत में भिंडरावाले के उभार के साथ सब कुछ बदल गया। वाम आंदोलन में गिरावट शुरू हुई और ऑपरेशन ब्लूस्टार इसमें टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
किसानों के मुद्दों पर किया काम
अजमेर ने बताया कि अल्ट्रा लेफ्ट एक्टिविस्ट्स ने बाद में किसानों के बीच काफी काम किया और अपनी यूनियन्स का गठन किया। इस काम में पुराने ऐक्टिविस्ट भी जुड़े। उनके संगठनात्मक कौशल, अनुभव और पैशन ने काम कर दिखाया। उन्होंने कर्ज के जाल, किसानों की आत्महत्या और मुआवजे के मुद्दों पर खूब काम किया। उनका ज्यादातर सपोर्ट बेस उन सिख किसानों के बीच में है, जिनका लेफ्ट विचारधारा से कोई खास लेना-देना नहीं है।
अजमेर ने बताया कि ये समूह कम्युनिस्ट विचारधारा को लेकर प्रतिबद्ध हैं लेकिन अब क्रांतिकारी रणनीतियों का इस्तेमाल बीते जमाने की बात हो गई है। उन्होंने बताया कि यह जाहिर बात है कि करीब दर्जन भर किसान यूनियन लेफ्टिस्ट या अल्ट्रा-लेफ्ट ग्रुपों द्वारा संचालित किए जाते हैं लेकिन अब उन्होंने खुद को केवल किसानों के मुद्दों तक ही सीमित रखा है।
-राघवेन्‍द्र शुक्‍ला (टाइम्स न्यूज नेटवर्क)

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