बासमती चावल की जीआई टैगिंग को लेकर भिड़े पंजाब और मध्य प्रदेश

नई दिल्‍ली। बासमती चावल को लेकर पंजाब और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बीच ठन गई है। मामला जीआई से जुड़ा हुआ है। GI टैग उन कृषि उत्पादों को दिया जाता है, जो किसी क्षेत्र विशेष में विशेष गुणवत्ता और विशेषताओं के साथ उत्पन्न होती है।
मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग देने की मांग की है लेकिन इस बात पर पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ऐतराज जताया है।
GI टैगिंग है क्या?
जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication) यानी कि भौगोलिक संकेतक। यह टैग उन कृषि उत्पादों को दिया जाता है जो किसी क्षेत्र विशेष में विशेष गुणवत्ता और विशेषताओं के साथ उत्पन्न होती है। किसी क्षेत्र विशेष के उत्पादों को GI टैग से खास पहचान मिलती है।
इन उत्पादों को मिल चुका है GI टैग
चंदेरी की साड़ी, कांजीवरम की साड़ी, दार्जिलिंग चाय और मलिहाबादी आम समेत अब तक 300 से ज्यादा उत्पादों को GI टैग मिल चुका है। महाबलेश्वर स्ट्रॉबेरी, जयपुर की ब्लू पॉटरी, बनारसी साड़ी, कोल्हापुरी चप्पल, तिरुपति के लड्डू, मध्य प्रदेश के झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गा सहित कई उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। नागपुर का संतरा और कश्मीर का पश्मीना भी जीआई पहचान वाले उत्पाद हैं।
1999 में संसद ने किया था लागू
भारतीय संसद ने 1999 में रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशंस ऑफ गुड्स’ लागू किया था। इस आधार पर भारत के किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाली विशिष्ट वस्तु का कानूनी अधिकार उस राज्य को दे दिया जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, जियोग्राफिकल इंडिकेशंस टैग्स का काम उस खास भौगोलिक परिस्थिति में पाई जाने वाली वस्तुओं के दूसरे स्थानों पर गैर-कानूनी प्रयोग को रोकना है।
किसे मिलता है टैग, क्या है फायदे?
GI टैग मिलने के बाद अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में उस वस्तु की कीमत और उसका महत्व बढ़ जाता है। GI टैग मिल जाने से बढ़ी हुई एक्सपोर्ट और टूरिज्म की संभावनाएं किसानों और कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाती हैं। किसी भी वस्तु को GI टैग देने से पहले उसकी गुणवत्ता, क्वालिटी और पैदावार की अच्छे से जांच की जाती है। यह तय किया जाता है कि उस खास वस्तु की सबसे अधिक और ओरिगिनल पैदावार निर्धारित राज्य की ही है।
मिले-जुले टैग का उदाहरण बासमती चावल
कई बार ऐसा भी होता है कि एक से अधिक राज्यों में बराबर रूप से पाई जाने वाली फसल या किसी प्राकृतिक वस्तु को उन सभी राज्यों का मिला-जुला GI टैग दिया जाए। यही बासमती चावल के साथ हुआ है। बासमती चावल पर पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों का अधिकार है। भारत में जीआई टैगिंग वाले बासमती को उसकी गुणवत्ता, स्वाद और खुशबू के लिए दी जाती है। हिमालय की तलहटी में बसे क्षेत्रों में इंडो-गेंजेटिक क्षेत्र में पैदा होने वाली बासमती का स्वाद और खुशबू की पहचान सारे विश्व में विख्यात है।
-एजेंसियां

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